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नीतीश राज में पहली बार 15 हजार करोड़ का राजकोष घाटा, 92 हजार करोड़ का हिसाब ही नहीं, कैग की रिपार्ट में खुलासा

Published On :    1 Jul 2022   By : MN Staff
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बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को सदन में कैग की रिपोर्ट रखी गई. रिपोर्ट में नीतीश सरकार को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है.



पटना : बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को सदन में कैग की रिपोर्ट रखी गई. रिपोर्ट में नीतीश सरकार को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2021 तक नीतीश सरकार ने 92 हजार 687 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा ही नहीं किया है. यानी हिसाब ही नहीं दिया है. उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं करना साबित करता है कि धोखाधड़ी की पूरी संभावना है. यही नहीं, 2004-05 के बाद पहली बार 11,325 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व का घाटा हुआ है. यानी राबड़ी देवी के शासन काल के बाद नीतीश राज में पहली बार इतना बड़ा राजकोषीय घाटा का सामना करना पड़ा है.


कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि 29827 करोड़ का राजकोषीय घाटा दर्ज किया गया है. यह पिछले साल की तुलना में 15,103 करोड़ बढ़ गया है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान राज्य को 2004-05 के बाद दूसरी दफा 11,325 करोड़ से अधिक के राजस्व घाटा का सामना करना पड़ा है.


रिपोर्ट के अनुसार, बिहार का प्राथमिक घाटा वर्ष 2019-20 में 3,733 करोड़ से बढ़कर 2020-21 में 17,343 करोड हो गया. यह पिछले वर्ष की तुलना में साल 2020-21 में राजस्व प्राप्ति में 3.17 फीसदी की वृद्धि हुई है. इस प्रकार पिछले साल की तुलना में कुल 3,936 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं, राजस्व व्यय में 10.69 फीसदी यानी 13,476 करोड़ की वृद्धि हुई है. 2020-21 में पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की तुलना में  5,905 करोड़ (47.99 फीसदी) की वृद्धि हुई.


रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष की तुलना में सार्वजनिक ऋण में 29,035 करोड़ की वृद्धि हुई. कैग के अनुसार, बकाया कर्ज बजट के आकार के करीब पहुंच रहा है, क्योंकि 2020-21 में राज्य सरकार का कुल खर्च 165696 करोड़ था, जबकि कर्ज 177214.85 करोड़.



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रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2021 तक 92,687.31 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अधिक मात्रा में उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहना राशि के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के जोखिम को बढ़ाता है. सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो कैग ने अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ी की ओर इशारा किया है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2021 तक डीसी बिल प्रस्तुत नहीं होने के कारण कुल 26,504 एसी विपत्र, जिसकी राशि 13459.71 करोड़ लंबित थे. कैग का कहना है कि अग्रिम राशि का समायोजन नहीं होना, धोखाधड़ी हो सकता है.


रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कोरोना महामारी की वजह से राज्य सरकार खजाना में जमा राशि भी खर्च नहीं कर पाई. सरकार ने 2020-21 में कुल दो लाख 45 हजार 522 करोड़ रुपये के व्यय का प्रविधान किया था. लेकिन एक लाख 67 हजार 915 करोड़ रुपया ही खर्च हो पाया. रिपोर्ट में कहा गया है कि कम खर्च के बाद भी 33,768 करोड़ रुपये का अनुपूरक प्रावधान किया गया. यह पूरी तरह अनावश्यक था. क्योंकि वास्तविक खर्च मूल बजट के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाया.


रिपोर्ट में राज्य की बढ़ती देनदारियों की भी चर्चा की गई है. इसके मुताबिक 2020-21 के दौरान जो उधार लिए गए, उसका करीब 54 प्रतिशत हिस्सा पुनर्भुगतान पर खर्च किया गया. इससे राज्य में परिसंपत्तियों का निर्माण प्रभावित हुआ. रिपोर्ट में कहा गया कि जेंडर बजट में ए श्रेणी की 29 योजनाओं के लिए 2932 करोड़ रुपये उपलब्ध थे. यह राशि खर्च नहीं हो सकी. बाल कल्याण बजट में 2958 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. बाल कल्याण की 48 योजनाओं पर राज्य सरकार एक भी रुपया खर्च करने में विफल रही. रिपोर्ट के मुताबिक हरित बजट बनाने वाला बिहार देश का पहला राज्य है. लेकिन, इसके लिए आवंटित पूरी राशि भी नहीं खर्च हो पाई.
 



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