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साम्प्रदायिक घृणा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें बोम्मई सरकार, 60 से अधिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों की मांग

Published On :    25 Jun 2022   By : MN Staff
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सांप्रदायिकता फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग कि गई है. इसके साथ ही पत्र में सांप्रदायिकता फैलाने वालों पर मुकदमा चलाने की गुहार लगाई है. पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा और हिंसा को भड़काने का काम कर रहे हैं.



नई दिल्ली : बीते कुछ महीनों से कर्नाटक में हिजाब लेकर हलाल, अवैध धर्मांतरण, लव जिहाद और मंदिर मेले में मुस्लिम दुकानदारों को प्रतिबंधित करने को लेकर सुबे की फिजाओं में सांप्रदायिकता की जहरीली हवा घोलने की कोशिश हुई है. जिसमें ब्राम्हणवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा मुस्लिमों और ईसाईयों को निशाना बनाया गया. इसको लेकर कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार को 60 से अधिक शिक्षाविदों, लेखकों, फिल्म निर्माताओं और सेवानिवृत्त सिविल सेवकों पत्र लिखा है. इसमें सांप्रदायिकता फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग कि गई है. इसके साथ ही पत्र में सांप्रदायिकता फैलाने वालों पर मुकदमा चलाने की गुहार लगाई है. पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा और हिंसा को भड़काने का काम कर रहे हैं.



पत्र पर इतिहासकार रामचंद्र गुहा, लेखक शशि देशपांडे, अम्मू जोसेफ, पोइल सेनगुप्ता, फिल्म निर्माता गिरीश कासरवल्ली, एम.एस. सत्यू और कविता लंकेश (गौरी लंकेश की बहन), सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रोफेसर मोहन राव, पूर्व राजनयिक चिरंजीव सिंह, सेवानिवृत्त सिविल सेवक येलप्पा रेड्डी और एन.टी. अब्रू, शिक्षाविद चंदन गौड़ा और एस जफेट के हस्ताक्षर हैं.



मुख्यमंत्री को पत्र लिखने वाले सभी 60 से अधिक लोगों ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन करीब एक महीना बीतने के बाद भी समय ना मिलने की वजह से इन सभी ने एक पत्र लिखा. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कर्नाटक के राष्ट्र कवि के रूप में प्रतिष्ठित कुवेम्पु ने “सर्व जनांगदा शांति थोटा (विभिन्न समुदायों के लिए शांति का बगीचा)” के रूप में वर्णित किया था, जो अब अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत और हिंसा के लिए जाना जाता था.


यह भी पढ़ें : शिवसेना से बगावत करने वाले विधायकों का विरोध तेज, बागी विधायकों के दफ्तर पर शिवसैनिकों का हमला 



पत्र में प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने आरोप लगाते हुए कहा है ‘‘यह और भी अधिक चिंताजनक है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोग, जिनमें कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने भारत के संविधान के भावना को बनाए रखने और पालन करने की शपथ ली है, वे अब खुले तौर पर उस गंभीर प्रतिज्ञा का उल्लंघन कर रहे हैं और अल्पसंख्यक सदस्यों को निशाना बना रहे हैं.



पत्र में आगे कहा गया है, ‘‘जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग धमकी, सतर्कता, हिंसा, संपत्ति के जबरन अधिग्रहण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार को मान्य, समर्थन और यहां तक कि बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, ऐसा प्रतीत होता है. सभी का उद्देश्य अल्पसंख्यकों को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाना है जो अब अपने संवैधानिक अधिकार के आनंद की उम्मीद नहीं कर सकते हैं.’’ माना जा रहा है कि यह पत्र इसलिए लिखा गया है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में भाजपा सांसदों और मंत्रियों ने कई विवादित बयान दिए हैं.



बताते चले कि इत्तेफाक कहा जाए या कोई सियासी साजिश कि जिन-जिन राज्यों में चुनाव हुए या होने हैं वहां की फिजाओं में सांप्रदायिकता की जहरीली हवा घुलती जा रही है. कर्नाटक में अगले साल मई में विधानसभा चुनाव हैं. बीजेपी यहां सत्ता में है. पिछले कुछ दिनों से राज्य में ध्रुवीकरण की सियासत जोर पकड़ रही है. मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने का विरोध करने के बहाने साम्प्रदायिक हिंसा की शुरुआत हुई और फिर हलाल, अजान और मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार के आह्वान तक पहुंच गई. इतना ही नहीं हुबली में एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हिंसा भड़क उठी थी.



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