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बीजेपी ने खेला आदिवासी कार्ड, द्रौपदी मुर्मू को बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार, भविष्य में आदिवासी वोटों को साधने की कोशिश

Published On :    22 Jun 2022   By : MN Staff
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मयूरभंज के रायरंगपुर से बीजेपी के टिकट पर दो बार विधायक बनीं. मुर्मू बीजेपी के एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भी रही है. वही ओडिशा सरकार में मंत्री रह चुकी हैं.



नई दिल्ली : साल 2024 के लोकसभा चुनाव और अन्य राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए आदिवासी वोटरों को साधने के लिए भाजपा ने पहली बार आदिवासी दांव चला है. इस कड़ी में बीजेपी ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की है.



द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले के आदिवासी समुदाय से आती हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में बीजेपी में कई पदों पर काम किया. वह मयूरभंज के रायरंगपुर से बीजेपी के टिकट पर दो बार विधायक बनीं. मुर्मू बीजेपी के एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भी रही है. वही ओडिशा सरकार में मंत्री रह चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया. उधर कभी जनसंघ और बीजेपी के कद्दावर नेता रहे यशवंत सिन्हा को विपक्ष ने राष्ट्रपति पद के अपना उम्मीदवार बनाया है. अब उनका मुकाबला एनडीए की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू से होगा.



एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति के लिए उनके नाम के ऐलान के बाद द्रौपदी मुर्मू ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं, यह जानकर हैरान होने के साथ-साथ खुशी भी हुई. उन्होंने कहा, ‘‘आशा है कि ओडिशा के सभी सांसद और विधायक मेरा समर्थन करेंगे क्योंकि मैं राज्य से दो बार विधायक और बीजद-भाजपा सरकार में मंत्री भी रही.


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गौरतलब है कि देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बन पाया है. हालांकि आदिवासी समाज से देश के सर्वोच्च पद पर किसी आदिवासी व्यक्ति को बैठाए जाने की मांग उठती रही है. लेकिन किसी पार्टी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया. अब अचानक बीजेपी का आदिवासी प्रेम जाग उठा. बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया. द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतती हैं तो वो देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी. सियासी जानकारों का मानना है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख कर आदिवासी कार्ड बीजेपी ने खेला. बीजेपी को लगता है कि इससे उन्हें सियासी तौर पर आगामी राज्यों के चुनाव में ही नहीं बल्कि 2024 के चुनाव में भी लाभ  मिल सकता है.



बीजेपी लंबे समय से खुद को आदिवासियों की सबसे भरोसेमंद पार्टी के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने द्रौपदी मुर्मू को कैंडिडेट बनाकर आदिवासी समुदाय को साधने का सियासी दांव चला है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन 47 आरक्षित सीटों में से 31 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में कई राज्यों में आदिवासी वोटों की नाराजगी के चलते नुकसान भी उठाना पड़ा था. खासकर झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात में है, जिनमें से झारखंड को छोड़कर बाकी राज्यों 2024 से पहले चुनाव होने हैं.



गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में है. गुजरात में इसी साल और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 2023 में चुनाव होना है. इन चार राज्यों के आदिवासी सीटों के नतीजे को देखें तो बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. वहीं देश में आदिवासी 8 फीसदी हैं, जो कुल आबादी के 10 करोड़ से अधिक हैं. जानकारों का मानना है कि भविष्य में सियासी लाभ लेने के लिए बीजेपी ने आदिवासी दांव चला है.



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