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तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने वाला बिल संसद के दोनों सदनों से बिना चर्चा से हुआ पास

Published On :    29 Nov 2021   By : MN Staff
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कृषि कानून वापसी बिल होने के बाद लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित किया गया



नई दिल्ली : संसद के दोनों सदनों में हंगामे के बीच तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी कृषि विधि निरसन विधेयक 2021 को बिना चर्चा के ही मंजूरी दी. कृषि कानून वापसी बिल होने के बाद लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित किया गया. कृषि कानूनों के दोनों सदनों से रद्द होने के बाद राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन को लेकर कहा है कि आंदोलन जारी रहेगा.



लोकसभा के बाद कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 राज्यसभा से भी पारित हो गया है. इस मंजूरी के साथ ही राज्यसभा की बैठक दोपहर दो बज कर दस मिनट पर आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई. वहीं लोकसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित किया गया है. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कृषि बिल वापसी पर कहा कि, आज कृषि क़ानून निरसन विधेयक बिना चर्चा के लोकसभा में पास किया गया है. हम उसे सपोर्ट करते हैं लेकिन हम चाहते थे कि बिल वापसी पर चर्चा हो कि आखिर इसे वापस लेने में क्यों इतनी देर हुई और दूसरे मुद्दे भी हैं जिन पर चर्चा हो, लेकिन उन्होंने टालने की कोशिश की.



कांग्रेस की तरफ से उठाए गए सवाल पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि सदन में व्यवस्था नहीं है और इस हालात में चर्चा कैसे करायी जा सकती है. आप व्यवस्था बनाये तब चर्चा करायी जा सकती है. इसके बाद सदन ने शोर शराबे में भी ही बिना चर्चा के कृषि विधि निरसन विधेयक को मंजूरी दे दी.


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इससे पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने सरकार से किसानों के उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी को लेकर तत्काल कानून बनाने के संबंध में कदम उठाने की मांग की. तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा देने का विषय तथा महंगाई का मुद्दा भी बैठक में उठा.



संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में विभिन्न दलों के 42 नेताओं ने हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के सकारात्मक सुझावों पर विचार करने और नियमों के तहत अध्यक्ष एवं सभापति की अनुमति से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने को तैयार है. जोशी ने कहा कि हमने अपील की है कि सदन में बिना किसी व्यवधान के कामकाज हो.



सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कोरोना के कारण जान गंवाने वालों को 4 लाख का मुआवजा देने की मांग की. इसके साथ सरकार से किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को भी मुआवजा देने को कहा गया. वहीं नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने जहां नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को वापस लेने की मांग की वहीं जदयू, अपना दल, आरपीआई जैसे दल जातिगत जनगणना के मामले में सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की.



एनडीए की बैठक के बाद एनपीपी की नेता अगाथा संगमा ने कहा, मैंने सीएए को वापस लेने की मांग रखी है. इस कानून के कारण पूर्वोत्तर में लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के पास नागरिकता से संबंधित ठोस दस्तावेज नहीं हैं. इसी कारण असम में जनजाति वर्ग के कई लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. संगमा ने कहा, पूर्वोत्तर के लोगों की भावनाओं का आदर किया जाना चाहिए.



वहीं जदयू, अपना दल और आरपीआई ने सरकार से जातिगत जनगणना मामले में स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की. अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने कहा, सरकार नीतिगत स्तर पर इसकी विरोधी नहीं है। अगर कुछ समस्या है तो इस मामले में एनडीए के घटक दलों की विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए. इस मुद्दे पर देश को सरकार के स्पष्ट रुख का पता चलना चाहिए. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी इसी तरह की मांग की. बैठक की अध्यक्षता कर रहे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सीएए की वापसी पर तो कुछ नहीं कहा, मगर जातिगत जनगणना कराने संबंधी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया.



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