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सपा- रालोद गठबंधन पर घंटों चली बात, 36 सीटों पर हुआ मंथन, रालोद को मिली 30 सीटें

Published On :    24 Nov 2021   By : MN Staff
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हालांकि दोनों ने सीटों के बंटवारे पर पत्ते तो नहीं खोले पर चर्चा है कि 36 सीटों पर मंथन हुआ है.



लखनऊ : सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख चौधरी जयंत सिंह की मंगलवार को गठबंधन को लेकर घंटों बात हुई. हालांकि दोनों ने सीटों के बंटवारे पर पत्ते तो नहीं खोले पर चर्चा है कि 36 सीटों पर मंथन हुआ है. इनमें 30 रालोद के हिस्से में आ रही हैं जबकि छह सीटों पर रालोद और सपा के कार्यकर्ता सिंबल बदलकर चुनाव लड़ सकते हैं.



उप्र विधानसभा चुनाव 2022 में सपा और रालोद का गठबंधन तो हो चुका है पर सीटों के बंटवारे को लेकर महीनों से मशक्कत चल रही है. पश्चिमी उप्र में रालोद अपना तगड़ा दावा पेश कर रहा है. उधर, सपा मुखिया पश्चिमी उप्र में एक तरफा सारी सीटें रालोद को देने के मूड में नहीं हैं. मसलन मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, मेरठ, बुलंदशहर, बिजनौर, मथुरा आदि जिलों में सपा अपने भी ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार लड़ाना चाह रही है. प्रत्येक जिले में सपा और रालोद का अनुपात तय करने की बात कही जा रही है. चूंकि इन जिलों में जहां सपा का जनाधार रहा है तो वहीं कई दिग्गजों ने इसी आस में सपा का दामन थामा है कि इन्हें वहां से टिकट मिलेगा. उधर जयंत चौधरी का इन सीटों पर तगड़ा दावा है. उनका कहना है कि यहां पूरा समीकरण ही रालोद का है. इसी रस्साकसी में अभी तक सीटों के बंटवारे का एलान नहीं हो पाया है.


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मंगलवार सुबह जयंत लखनऊ पहुंचे और अखिलेश के आवास पर दोनों की बात हुई. घंटों तक चले मंथन में एक एक सीट के समीकरण पर चर्चा की गई. बताया जा रहा है कि तीस सीटों पर रालोद को लड़ाना तय हुआ है. उधर छह ऐसी सीटों पर भी बात बनी है जिनमें सपा के उम्मीदवार रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे तो रालोद केउम्मीदवार सपा के टिकट पर. इन्हीं छह सीटों पर अभी एक बार और बैठक होने की चर्चा है. मुलाकात के बाद दोनों ने ही ट्वीट कर और एक साथ फोटो अपलोड कर सकारात्मक परिणाम की ओर इशारा किया.



रालोद से गठबंधन से पहले अखिलेश ने केशव देव मौर्य के महान दल, डा. संजय सिंह चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), शरद पवार की एनसीपी और ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा से गठबंधन किया है. राजभर  राजभर गाजीपुर के हैं और आसपास के जिलों में उनकी जाति का अच्छा वोट बैंक है. जाहिर है छोटे दलों से गठबंधन के पीछे अखिलेश की जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति है जिसकी सफलता की कसौटी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के परिणाम होंगे. जहां तक रालोद का सवाल है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर उसका प्रभाव है. रालोद से दोस्ती कर अखिलेश की मंशा पश्चिम की जाट बेल्ट में स्थिति मजबूत करने की है.



बता दें कि विधानसभा चुनाव के लिए जब पार्टियां एक-दूसरे के संपर्क में थी तब जयंत चौधरी और प्रियंका गांधी की मुलाकात चर्चाओं में रही. कांग्रेस और रालोद के गठबंधन को लेकर भी कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अखिलेश और जयंत की मंगलवार को हुई मीटिंग ने साफ कर दिया कि दोनों पार्टियां 2022 के चुनाव में भी साथ-साथ रहेंगी.



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