×
भारत /

उत्तराखंड का 16वां बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ संयुक्त राज्य अधिवेशन

Published On :    16 Aug 2020   By : MN Staff
शेयर करें:


विदेशी ब्राह्मण ही ओबीसी के असली दुश्मन हैं : प्रदीप अम्बेडकर



देहरादून :

यूनिवर्सिटी ऑफ थॉट बामसेफ
हमारे मूलनिवासी बहुजन समाज को उसके ही इतिहास के बारे में जानकारी नहीं है. इतिहास में क्या होता है? हारने वाले लोग इतिहास नहीं लिखते हैं, जितने वाले लोग ही इतिहास लिखते हैं और जीतने वाले लोग अपने ढंग से इतिहास लिखते हैं. अब सवाल है कि क्या हारने वाले लोगों का इतिहास नहीं होता है? हारने वाले लोगों का भी इतिहास होता है. मगर, जीतने वाले लोगों ने जो इतिहास लिखा होता है उसी इतिहास में हारने वाले लोगों का भी इतिहास छिपा होता है. बस उसे ढूंढने और खोजने की नजरिया चाहिए. बामसेफ पूरे देश भर में मूलनिवासी बहुजन समाज को एक नजरिया देने का काम कर रहा है. एक स्कूल ऑफ एजुकेशन होता है. स्कूल ऑफ एजुकेशन में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई होती है. दूसरा होता है स्कूल ऑफ थॉट. यहां विचारधारा की पढ़ाई होती है. इसी तरह से बामसेफ भी एक यूनिवर्सिटी आफ थॉट है, जहां विचारधारा की पढ़ाई होती है.

दोस्त और दुश्मनों की पहचान करना ही जागृति कहलाती है. एससी, एसटी, ओबीसी को उसके इतिहास की जानकारी नहीं है कि वे आपस में बिछड़े हुए भाई हैं. अब तक ओबीसी यही जानता था कि एससी, एसटी ही उसका असली दुश्मन हैं. जबकि एससी, एसटी, ओबीसी का दुश्मन नहीं है, ओबीसी का असली दुश्मन ब्राह्मण है. क्योंकि, ब्राह्मणों द्वारा ओबीसी के दिमांग में बार-बार डाला जाता रहा है कि एससी, ओबीसी के दुश्मन हैं. लेकिन, बामसेफ की वजह से ओबीसी समाज के लोग अब जागृति हो रहे हैं. इसलिए ओबीसी के लोगों को जानकारी होने लगी है कि ओबीसी का असली दुश्मन एससी नहीं, ब्राह्मण हैं. 
यह बात इंडियन इंजीनियर प्रोफेशनल एसोसिएशन (आइईपीए) के राष्ट्रीय प्रभारी प्रदीप अम्बेडकर ने 15 अगस्त 2020 को उत्तराखंड राज्य के बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ का 16वाँ संयुक्त एवं प्रथम वर्चुअल राज्य अधिवेशन के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए कही. इस वर्चुअल राज्य अधिवेशन का उद्घाटन डॉ. धर्मेंन्द्र कुमार ने किया. वहीं वक्ताओं के रूप में हर्षपति एवं विजय पाल सिंह ने संबोधित किया.



प्रदीप अम्बेडकर ने कहा कि भारत के संविधान के अनुसार आर्टिकल 82 के अनुसार परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है, परिसीमन आयोग हर 10 साल बाद गठन किया जाता है. क्योंकि 10 साल के बाद जनगणना होती है और उस जनगणना में जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन आयोग गठन करते हैं. इसमें एमएलए, एमपी, जिला पंचायत और प्रधान का भी सीमा निर्धारण होता है. 


जिसका उद्देश्य जहां जिसकी जितनी जनसंख्या है उसको उसकी जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व होनी चाहिए. लेकिन उत्तराखंड में क्या हुआ? परिसीमन के अनुसार देखने से पता चलता है कि 2014 में क्षेत्र पंचायतों की जो सीटें ओबीसी की थी वह 2019 में शेड्यूल्ड कास्ट का हो गया. इसी तरह से जो सीटें 2014 में शेड्यूल्ड कास्ट की थी वे सीटें 2019 में ओबीसी की हो गई तो कहीं महिला रिजर्व सीट हो गया. यानी बहुजन समाज में एससी, एसटी, ओबीसी के लोग लड़ने भिड़ने के लिए तैयार थे उनको भौगोलिक आधार पर बंटवारा करके सीटें चेंज कर दी गई. इस तरह से हमारे लोगों के साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी किया गया.


ओबीसी की जाति आधारित गिनती को लेकर प्रदीप अम्बेडकर ने कहा कि इतिहास के क्रम में जाते 1871 में पहली बार गिनती हुई थी. 1871 से तय हुआ कि हर 10 साल के बाद जनगणना की जाएगी. इस तरीके से 1871 से लेकर 1931 तक गिनती हुई. इस जनगणना से क्या फायदा हुआ? एक उदाहरण के माध्यम से बताना चाहता हूँ. 1902 में छत्रपति शाहूजी महाराज ने राज्य में 50 फीसदी रिजर्वेशन पिछड़ों को बहाल किया. क्योंकि कास्ट सेंसस से पता चल गया कि कौन-कौन सी जातियां पिछड़ी है, कौन सी कौन सी जातियां दबी कुचली है. 


इससे एक आंकड़ा पता चल गया उस आंकड़े के आधार पर उन्होंने 1902 में 50 प्रतिशत रिजर्वेशन बहाल किया. यह किस आधार पर हुआ? 1901 में हुई जाति आधारित गिनती के आधार पर हुआ. यानी शाहूजी महाराज ने कास्ट सेंसस का फायदा लिया. उन्होंने कहा देश में 1931 तक अंतिम बार जाति आधारित गिनती हुई. 1931 के बाद जब 1941 में जाति आधारित गिनती का मामला आया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण गिनती नहीं सकी. इसके बाद 15 अगस्त 1947 को सत्ता का हस्तानांतरण हुआ, एक विदेशी अंग्रेज चले गये और जाते-जाते देश की सत्ता दूसरे विदेशी ब्राह्मणों के हाथ में दे गए.


प्रदीप अम्बेडकर ने कहा, अंग्रेजों के जाने के बाद ब्राह्मणों को सत्ता मिली. आज 15 अगस्त है, पूरा देश आजादी का जश्न मना रहे हैं. लेकिन, क्या यह हमारे आजादी का दिन है? जो 15 अगस्त 1947 की आजादी है वह तथाकथित आजादी है. क्योंकि, 1947 में सत्ता का हस्तानांतरण हुआ था. लॉर्ड माउंटबेटन ने जो बिल पारित किया था वह ‘‘ट्रांसफर ऑफ द पावर’’ इस ट्रांसफर ऑफ पावर बिल की वजह से अंग्रेज विदेशी चला गया और दूसरा विदेशी ब्राह्मण इस देश का हुक्मरान हो गया और ब्राह्मणों ने घोषणा कर दिया हमारा देश आजाद हो गया. 


मगर, इस देश का मूलनिवासी समाज आज भी गुलाम का गुलाम रह गया. अंग्रेजों के जाने बाद नेहरू प्रधानमंत्री बने और नेहरू ने 1951 और 1961 में होने वाली जाति आधारित गिनती को रोक दिया. 1971 और 1981 इंदिरा गांधी ने रोकी. 1991 पीवी नरसिम्हा राव ने रोका, 2001 में अटल बिहारी बाजपेई ने रोका, 2011 में मनमोहन सिंह पीएम थे, मगर वे सारे फैसले लेने का अधिकार प्रणब मुखर्जी को दिया था. इसलिए प्रणव मुखर्जी ने जाति आधारित गिनती पर रोक लगा दी. यानी देश में होने वाली जाति आधारित गिनती को केवल ब्राह्मणों ने रोकने का काम किया है. अब 2021 में गिनती होनी चाहिए, इसके लिए हम लोग आंदोलन और लड़ाई की तैयारी जन जागरण के माध्यम से कर रहे हैं.


उन्होंने कहा बाबसाहब अंबेडकर अकेले ओबीसी की लड़ाई लड़ रहे थे. किस लिए क्योकि ओबीसी को संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए. इसलिए उनकी लड़ाई लड़ रहे थे. यही नहीं ओबीसी को अधिकार मिलना चाहिए, इसलिए बाबासाहब ने अपने कानून मंत्री पद से इस्तिफा दे दिया था. 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक हुई, संविधान सभा की बैठक में जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्ताव दिया कि संविधान के अंदर ओबीसी को अधिकार दिए जाएंगे. मगर, 29 अगस्त 1947 की जब संविधान सभा की बैठक हुई, जिसमें बाबासाहब अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमिटी का चेयरमैन बनाया गया. उसमें नेहरू ने कहा की ओबीसी को कुछ नहीं दिया जायेगा. इसके पीछे बजह यह थी कि है उस समय यानी 1947 में भारत-पाकिस्तान का विभाजन होने वाला था. 


उस विभाजन में बड़े पैमाने पर दंगे होने वाले थे. उस दंगे में ओबीसी का इस्तेमाल मुसलमानों के खिलाफ लड़ाने के लिए करने वाले थे. इसीलिए उसने आश्वासन दिया था कि ओबीसी को अधिकार दिया जाएगा. लेकिन, 29 अगस्त तक देखा कि अब ओबीसी को लड़ाने भिड़ाने का मामला खत्म हो गया, अब उन्हें ओबीसी की जरूरत नहीं है तब नेहरू कहता है कि ओबीसी को अधिकार नहीं दिए जाएंगे. इसका मतलब है कि 1947 के बाद ओबीसी के साथ धोखेबाजी करने का काम नेहरू ने किया और 1947 के पहले  मोहनदास करमचंद गांधी ने किया है.


प्रदीप अम्बेडकर ने आगे कहा, इस तरह से जाति आधारित गिनती रोकने का काम ब्राह्मणों ने किया. इसलिए हमारा दुश्मन ब्राह्मण हैं. इसलिए हमें दोस्त और दुश्मन की पहचान करनी होगी. आगे उन्होंने कहा ओबीसी की गिनती ओबीसी के नाम पर नहीं, हिंदू के नाम पर की जाती है. जबकि, एससी, एसटी की गिनती जाति के आधार पर होती है. यह बात ओेबीसी को समझने की जरूरत है. जिस दिन ओबीसी को यह बात समझ में आ जायेगी कि उनकी गिनती ओबीसी के नाम पर नहीं हिंदू के नाम पर की जाती है उसी दिन उनको यह भी समझ में आ जायेगा कि उनके साथ धोखेबाजी की जा रही है. उनको यह भी समझ में आ जायेगा कि उनको हिन्दू के नाम पर ब्राह्मणों का गुलाम बनाया जा रहा है. यही उनको यह भी समझ में आ जायेगा कि हिन्दू शब्द एक षड््यंत्र है. अगर ऐसा हुआ तो देश में नई क्रांति शुरू हो जायेगी. 


ब्राह्मण हमेशा क्रांति से घबराता है. ब्राह्मण परिवर्तन से घबराता है. क्योंकि, जब परिवर्तन होगा तो सबसे ज्यादा नुकसान ब्राह्मणों का होगा. क्योकि उन्होंने जिन व्यवस्थाओं का निर्माण किया है उस व्यवस्था में ब्राह्मण सबसे ऊपर है. सारे अधिकारों पर उसका कब्जा है. अगर उसमें परिवर्तन हुआ तो ब्राह्मण ऊपर से सीधे नीचे गिर जाएगा और सभी अधिकारों पर से उसका नाजायज कब्जा हट जायेगा. इसका मतलब है कि परिवर्तन होगा तो सबसे ज्यादा नुकसान ब्राह्मणों का होगा. इसलिए ब्राह्मण नुकसान नहीं उठाना चाहते है. यही कारण है कि ब्राह्मण ओबीसी की जाति आधारित गिनती नहीं करना चाहते हैं.


अंत में उन्होंने कहा, बामसेफ निरंतर पिछड़े वर्ग को जगाने का काम कर रहा है. इस जागृति का बड़े पैमाने पर कामयाबी मिल रही है. बामसेफ के माध्यम से देशभर में पिछड़ा वर्ग समाज जागृत हो रहा है. हम मूलनिवासी बहुजन समाज से अपील करते हैं 2021 में जाति आधारित गिनती होनी चाहिए. इसके लिए सारे पिछड़े वर्ग के लोगों को एकजुट होकर सड़कों पर आने की जरूरत है. इस देश में एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है. बामसेफ इस दिशा में काम कर रहा है. इस आंदोलन में एससी, एसटी, ओबीसी, मायनॉरिटी को साथ सहयोग देने ही जरूरत है. तभी हम ब्राह्मणों की गुलामी से मुक्त हो सकते हैं. 



PAY BACK TO THE SOCIETY NATIONWIDE AGITATION FUNDDonate Here



संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
फर्जी पुलिस गैंग का पर्दाफाश, गैंगस्टर विकास दुबे का भां
केरल भाजपा प्रमुख की बढ़ी मुश्किले, कोर्ट ने रिश्वत के माम
त्रिपुरा में भी बीजेपी को लग सकता है बड़ा झटका, मुकुल रॉय त
कालाधन वापस लाने के दावे की निकली हवा, स्विस बैंक में 27 हजा
आईटी सेक्टर में नौकरियों में कटौती की खबर को लेकर सुब्रम
यूएपीए के तहत पांच साल में 7840 गिरफ्तार, केवल 155 पर ही साबित क
महाकुंभ के दौरान हुए कोरोना टेस्टिंग के फर्जीवाड़ा में एफ
मंदिर निर्माण के लिए बनाए गये ट्रस्ट में दी गई भ्रष्टाचा
डीजल-पेट्रोल 100 के पार, खाने का तेल 200 पार, आ गए अच्छे दिन
प्रधानमंत्री के पास विज़न के नाम पर बस टेलीविजन है, कुमार व
दिल्ली दंगा के आरोपी तीन स्टूडेंट्स को तुरंत जेल से रिहा
सीबीआई के नए निदेशक का कार्यकाल बदलने का कारण बताने से के
बिरसा मुंडा के नाम पर एयरपोर्ट, स्टेडियम, अस्पताल लेकिन प
बसपा के निष्कासित विधायकों को शामिल कराया तो सपा टूटेगी,
सरकार ने अपनी मर्जी से बढ़ाया कोविशील्ड की दो डोज के बीच 12-16
मस्जिद जा रहे मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा, दाढ़ी काटी, ‘जय श्री
राम मंदिर लोगों के लिए आस्था का प्रतीक होगा, भाजपा-संघ के
जुनैद की हिरासत में मौत के आरोप में 12 पुलिसकर्मियों के खि
पुलवामा याद है, गलवान भूल गए क्योंकि कोई आया नहीं, कोई गया
नीतीश सरकार में आरटी-पीसीआर जांच घोटाला? 20 करोड़ के काम का ब
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper