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रोहित वेमुला और पायल तड़वी आत्महत्या मामले में केंद्र सरकार और युजीसी को नोटिस

Published On :    20 Sep 2019   By : MN Staff
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सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कहते हुए सरकार और यूजीसी से कहा है कि वह देश के अंदर विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से जाति आधारित भेद-भाव को खत्म करने की तरफ कदम बढ़ाए.



नई दिल्ली: देश के विश्‍वविद्यालयों सहित दूसरे शिक्षण संस्थानों में हो रहे जातिगत भेदभाव और उसके कारण रोहित वेमुला और पायल तड़वी की आत्महत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस भेजा है. जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली बैंच ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मां की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.


जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली बैंच ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, यूजीसी और एनएएसी को एक नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कहते हुए सरकार और यूजीसी से कहा है कि वह देश के अंदर विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेद-भाव को खत्म करने का प्रयास करे.


कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. रोहित वेमुला और पायल तड़वी दोनों की मां की वकील इंदिरा जयसिंह ने सुनवाई के दौरान कहा, इस मामले में यूजीसी की पूरी गाइडलाइन होने के बावजूद इस पर अमल नहीं होता है. उन्होंने कहा, देश में 288 यूनिवर्सिटी हैं. इसमें से कुछ डीम्ड यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन यहां पर कोई इक्यूटी कमीशन नहीं है.


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कॉलेज में जातिगत भेदभाव को जिम्मेदार बताकर आत्महत्या करने वाले रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मांओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गुहार लगाई थी कि शैक्षणिक और अन्य संस्थानों में जातिगत भेदभाव खत्म करने का सशक्त और कारगर मैकेनिज़्म बनाया जाए.


याचिकाकर्ता चाहती हैं कि कोर्ट यूजीसी को इस बाबत निर्देश जारी करे ताकि उच्च शैक्षिक संस्थानों के नियमन 2012 को सख्ती से लागू किया जा सके. याचिका में गुहार लगाई गई कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सभी छात्रों समान अवसर मुहैया करवाने के लिए विशेष सेल बनाएं. इससे अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों, शिक्षकों या कर्मचारियों के साथ भेदभाव की आंतरिक शिकायते निपटाने में मदद होगी. 



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