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इस साल जुलाई में भारतीयों ने अब तक की सर्वाधिक रक्कम भेजी विदेश

Published On :    17 Sep 2019   By : MN Staff
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मई 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से अब तक 45 अरब डॉलर से ज़्यादा की राशि विदेश भेजी जा चुकी है. वहीं यूपीए के दूसरे कार्यकाल के दौरान पांच सालों में विदेश भेजी गई कुल राशि 5.45 अरब डॉलर थी.



नई दिल्ली :  एक तरह जहां सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है, वहीं दुसरी तरफ भारत के लोगों ने इस साल जुलाई महीने में उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत 1.69 अरब डॉलर की सबसे अधिक मासिक रकम विदेश भेजी है.



इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एलआरएस स्कीम के तहत वित्त वर्ष 2019-20 के पहले चार महीनों में 5.8 अरब डॉलर विदेश भेजा जा चुका है. 


वहीं, मई 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से अब तक 45 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशों में भेजे जा चुके हैं. मोदी सरकार की तुलना में यूपीए के दूसरे कार्यकाल अप्रैल 2009- मार्च 2014 दौरान विदेश भेजी गई कुल एलआरएस राशि 5.45 अरब डॉलर थी.



आरबीआई के एलआरएस के तहत किसी भारतीय को एक वित्त वर्ष में रोजगार के लिए विदेश जाने, विदेशों में पढ़ाई, ईलाज, रिश्तेदारों को पैसे भेजने जैसी सुविधाओं के तहत ढाई लाख रुपये लाख रुपये बाहर भेजने का अधिकार है.



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भारतीय एलआरएस के तहत पूंजी खाता लेनदेन के लिए भी धन हस्तांतरित कर सकते हैं, जिसमें एक बैंक के साथ विदेशी मुद्रा खाता खोलना, संपत्ति खरीदना और म्यूचुअल फंड की इकाइयों में निवेश करना और दूसरों के बीच उद्यम पूंजी कोष शामिल कर सकते हैं.



आरबीआई के आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले पांच साल में एलआरएस के तहत 14 बिलियम डॉलर की रकम केवल यात्रा पर विदेश में खर्च की गई जबकि लगभग 10.5 अरब डॉलर की रकम करीबी रिश्तेदारों की देखभाल करने और 10 अरब डॉलर की रकम पढ़ाई के लिए भेजी गई. 



बाकी के 4.8 अरब डॉलर की रकम उपहार के रूप में जबकि 1.9 अरब डॉलर की रकम विदशों में इक्विटी और ऋण में निवेश के लिए खर्च की गई.



वहीं वर्ष 2010-14 की तुलना करने पर पता चलता है कि उस दौरान भारतीयों ने यात्रा के लिए विदेश में 129 मिलियन डॉलर की रकम खर्च की जबकि करीबी रिश्तेदारों की देखभाल के लिए 992 मिलियन डॉलर की रकम भेजी. इसकी तरह उपहार के लिए भारतीयों ने 1.17 अरब डॉलर की रकम विदेश में खर्च की.


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