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आर्थिक तंगी से झुज रहा है पद्मश्री अवार्ड प्राप्त किसान

Published On :    25 Jun 2019   By : MN Staff
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अब चींटियों के अंडे खाने को मजबूर है परिवार



ओडिशा  :   दैतारी नायक ने 70 साल की उम्र में अपने गांव के किसानों की सिंचाई के लिए तीन साल में पहाड़ से 3 किलोमीटर लंबी नहर खोद दी थी. उनके इस कारनामे की चर्चा देश भर में हुई. इतना ही नहीं सरकार ने उनके इस काम के लिए उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा था. दैतारी का परिवार अब बेहद बुरी परिस्थितियों का सामना कर रहा है. आर्थिक तंगी से जूझ रहे उनके परिवार का गुज़ारा अब चीटिंयों के अंडे खाकर हो रहा है. इसी वजह से वह अब अपना अवॉर्ड लौटाना चाहते हैं.

ओडिशा में पहाड़ खोदकर नहर निकालने वाले आदिवासी किसान दैतारी नायक अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाना चाहते हैं. उनका मानना है कि उनके जीवित रहने के रास्ते बंद हो चुके हैं.

ओडिशा के मांझी कहे जाने वाले दैतारी इतना सब करने क बाद भी गरीबी में ज़िंदगी गुज़ारने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि उन्हें देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने के बाद लोग उनकी इज्जत तो करते हैं पर उनको काम कोई नहीं देता.

ओडिशा टीवी की एक रिपोर्ट की मानें तो जिस नहर को खोदने के लिए पद्मश्री मिला था वह उसे पक्का कराने के लिए पिछले एक साल से प्रशासन से अनुरोध कर रहे हैं. लेकिन अभी तक उनकी अपील पर कोई सुनवाई नहीं हुई है. 


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दैतारी ने बताया कि बीमारी की हालत में उन्हें 5-7 किलोमीटर दूर पैदल चलकर इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है क्योंकि उनके गांव में कोई अस्पताल तक नहीं है. न ही वहां पक्की सड़क है. इतना ही नहीं दैतारी का कहना है कि उनके गांव में पीने के लिए पानी तक नहीं हैं. उनका कहना है कि हमारी परेशानियां पहले जैसी ही हैं. इसलिए पद्मश्री का भी मेरे लिए कोई उपयोग नहीं है इसीलिए मैंने उसे लौटाने का फैसला किया है.

दैतारी के बेटे अलेखा नायक का कहना है कि पहले उनके पिता दिहाड़ी मजदूर थे. जब से सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान मिला तबसे काम मिलना बंद हो गया. लोग उनका सम्मान करते हैं लेकिन मजदूरी नहीं देते. लोगों का मानना है कि हम अब बड़े लोग बन गए हैं.

वहीं दैतारी के गांव के ही रहने वाले एक शख्स का कहना है अवॉर्ड से न ही दैतारी का कोई उद्देश्य पूरा हुआ न ही गांव का. सब पहले जैसा ही है. जब उन्हें पद्मश्री मिला था तो सबको लगा था कि गांव में विकास का काम होगा लेकिन यहां की हालत पहले जैसी ही है. डर के कारण कोई दैतारी को काम भी नहीं देता.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट की मानें तो दैतारी नायक फिलहाल तेंदू के पत्ते और आम पापड़ बेचकर किसी तरह परिवार का खर्च चला रहे हैं हालांकि इससे भी उनकी कोई खास कमाई नहीं होती है. यूं तो सरकार की ओर से उनको 700 रुपये पेंशन मिलती है लेकिन उनके परिवार के लिए बेहद ही कम है. दैतारी नायक को इंदिरा गांधी आवास योजना के तहत एक मकान भी आवंटित हुआ था लेकिन घर अभी अधूरा ही है जिसके कारण उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर है.
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