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लिंगानुपात में असमानता

Published On :    23 Jun 2019   By : MN Staff
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प्रति एक हजार लड़कों पर 923 लड़कियाँ



नई दिल्ली :   भले ही भारत का महिला-पुरूष सेक्स रेशयो में कुछ सुधार देखने को मिला है, लेकिन अभी भी लिंगानुपात में ज्यादा असमानताएं ही दिखाई दे रही है. हालांकि, भारत का महिला-पुरूष सेक्स रेशयो 2018-19 में 2015-16 की तुलना में 8 अंक बढ़कर 931 हो गया है. जबकि, 2015-16 में यह रेशयो 923 था. मतलब प्रति एक हजार लड़कों पर 923 लड़कियाँ हैं. 


ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा रेशयो केरल और छत्तीसगढ़ में है. इन राज्यों में यह आंकड़ा 959 है. इसके बाद मिजोरम 958 और गोवा 954 हैं. लिस्ट में सबसे नीचे दमन-दीव 889, लक्ष्यद्वीप 891 और पंजाब 900 हैं. जबकि, 2015-16 में यह आंकड़ा 923 था, वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 926 पहुँच गया. 2017-18 में महिला-पुरूष रेशयो में और बढ़त दर्ज हुई और आंकड़ा 929 पहुँच गया.




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बता दें कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम हरियाणा से लॉन्च की गई थी. हरियाणा के रेशयो में 27 अंकों का सुधार हुआ है. 2015-16 में राज्य में यह आंकड़ा 887 था, जो अब बढ़कर 914 पहुँच गया है. 2015-16 और 2018-19 के आंकड़ों में तुलना करने पर पता चलता है कि 25 राज्यों (केंद्रशासित राज्य भी शामिल) में रेशयो बढ़ा है. सबसे ज्यादा उछाल लक्ष्यद्वीप में 832 से 891, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह 890 से 948, गोवा 918 से 954 और नागालैंड 904 से 936 की बढ़ोत्तरी हुई है.


चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिस तरह से सेक्स रेश्यों बढ़ा है उसी तरह से 11 राज्यों में सेक्स रेशयो कम भी हुआ है. सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा कमी आई है. यह आंकड़े लोकसभा में एक सवाल के जवाब में महिला और बाल विकास मंत्रालय ने दिए. सवाल सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम से संबंधित था. 


21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2017-18 के मुकाबले सेक्स रेशयो में बढ़त दर्ज की गई है. इनमें सबसे ज्यादा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 51 अंकों का उछाल आया है. 2017-18 में अंडमान में सेक्स रेशयो 897 था, जो बढ़कर अब 948 हो गया है. इसके अलावा सिक्किम 928 से बढ़कर 948, तेलंगाना 925 से बढ़कर 943 की बढ़त दर्ज की गई है. इसके अलावा 12 राज्य ऐसे हैं जहाँ 2017-18 की तुलना में सेक्स रेशयो में कमी आई है. इनमें अरुणाचल प्रदेश में 42 अंकों की कमी के साथ 956 से घटकर 914 पर आ गया है जो सबसे ज्यादा चिंताजनक है. अरुणाचल के बाद जम्मू-कश्मीर है जहाँ 958 से घटरकर 943 और तमिलनाडु 947 से घटरकर 936 पर आ गया है.

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