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आर्थिक भ्रष्टाचार में लिप्त गद्दार मनोज पासी के काले कारनामों की फेहरीस्त आई सामने

Published On :    7 Aug 2022   By : MN Staff
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बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने वालों में एक अहम नाम मनोज कुमार पासी का है. वह मूलतः इलाहाबाद जिले है. मनोज पासी ने संगठन में रहकर किए हुए आर्थिक घोटाले एवं संगठन विरोधी कामों को देखकर हमें बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर पर पथराव करने वाले भोला पासवान शास्त्री की याद आती है.



बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने वालों में एक अहम नाम मनोज कुमार पासी का है. वह मूलतः इलाहाबाद जिले है. मनोज पासी ने संगठन में रहकर किए हुए आर्थिक घोटाले एवं संगठन विरोधी कामों को देखकर हमें बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर पर पथराव करने वाले भोला पासवान शास्त्री की याद आती है. भोला पासवान शास्त्री ने भी समाज से गद्दारी कर मूलनिवासी बहुजनों के नेता का विरोध किया था. हालांकि अपने अंतिम समय में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली और उस बात के लिए उन्हें काफी पछतावा भी हुआ था. लेकिन मनोज कुमार पासी के बारे में ऐसा कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि उसने भोला पासवान शास्त्री से भी कई गुना बड़ा अपराध किया है, जिसके लिए उसे जेल भी हो सकती है. इसके अलावा समाज से भी उसे दंड मिल सकता है.


मनोज पासी को बहुजन मुक्ति पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था. राष्ट्रीय महासचिव का मतलब है कि देशभर में काम करना और इसके लिए अपने अंदर राष्ट्रीय भाव निर्माण करना. मगर उसके अंदर कभी भी राष्ट्रीय भाव पैदा नहीं हुआ या उसने जानबूझकर वह होने ही नहीं दिया. उसकी बातों से हमेशा प्रांतवादी विचार ही छलकते थे. अपने प्रांत के अलावा दूसरे प्रांतों से आए हुए लोगों के प्रति उसके मन में घृणा ही दिखाई देती थी. इसलिए उत्तर प्रदेश के अलावा किसी अन्य प्रांत के कार्यकर्ताओं का उससे अच्छा रिश्ता नहीं रहा. पैसों के मामले को लेकर भी मनोज पासी की नियत अच्छी नहीं थी. जो पैसा समाज से राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन निर्माण निधि के रुप में वह लेता था, उसे संगठन के पास जमा करने के बजाए खुद के पास ही रखता था.


बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक मनोज पासी समाज से इकठ्ठा किया हुआ पैसा अपने पास रखता था और उसके खुद के बैंक का चेक संगठन के पास देता था और उसमें भी कई बार उसने दिए हुए चेक बाउंस होते थे. इसका मतलब साफ है कि वह समाज से लिए हुए पैसों का गैर-इस्तेमाल करता था. चेक बाउंस होना क्रिमिनल ऑफेंस माना जाता है. कानूनी दृष्टी से वह बड़ा गुनाह है. दुसरी बात ये थी कि उसके पास यदि चेक है और किसी अन्य कार्यकर्ता के पास कैश है और उसे वह कैश संगठन के पास जमा करानी है, तो मनोज पासी अपना चेक उसे देता था और कार्यकर्ता से यह कहकर कैश लेता था की मै इसे संगठन के पास जमा करता हूं. मगर जमा ही नहीं करता था.


मनोज पासी और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप अम्बेडकर दोनों मिलकर उत्तर प्रदेश के पूर्णकालिन प्रचारकों को अलग से कूपन देते थे और कहते थे की इससे समाज से पैसे इकट्ठा करें. कुछ तुम्हारे पास रखो, कुछ हमारे पास दे दो और बचा हुआ संगठन के पास जमा कर दो. इस बात के लिए कुछ पूर्णकालिन प्रचारक तैयार हो गए थे और ऐसे ही भ्रष्ट मानसिकता के लोग इन दोनों का समर्थन कर रहे है. इतना ही नहीं प्रदीप राम तो संगठन का प्रचारक होने के साथ-साथ रियल एस्टेट का धंधा करता था. हमारे पास ऐसी भी जानकारी उपलब्ध हुई है कि प्रदीप राम संगठन से हड़प किए हुए पैसों से ही रियल एस्टेट का काम कर रहा था क्योंकि रियल एस्टेट का काम करने के लिए हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपयों की जरूरत होती है. यह सारा पैसा उसने समाज से ही चुराया हुआ था.


मनोज पासी संगठन से फर्जी बिल बनाकर पैसे लेता था. बात इसी साल के जनवरी महीने की है. 3 जनवरी को राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा की बरेली मण्डल की महारैली आंवला में होने जा रही थी. वहां के बहुजन मुक्ति पार्टी के कार्यकर्ता माखनलाल जो संगठन से उसी दौरान जुड़े थे, उन्होंने मंच पर लगने वाली कुर्सियां, छत और लोगों को बैठने के लिए 1000 कुर्सियों के लिए एक डेकोरेटर को 55 हजार रुपयों में तैयार किया था. उसके बाद वहां मनोज पासी आया. उसने वहां के ही सुशील गौतम और एक अन्य कार्यकर्ता को अपने साथ लिया. जिस डेकोरेटर से माखनलाल ने 55 हजार में काम तय किया था, उसी काम के लिए मनोज पासी और उसके साथियों ने 95 हजार रुपयों की बिल तैयार कराया. मखनलाल नए कार्यकर्ता थे इसलिए उन्हें ये बात समझ में नहीं आई की इसकी जानकारी किसे दी जाए इसलिए वे चुप थे. लेकिन आज जब मनोज पासी की गद्दारी सारे समाज के सामने आई, तब जाकर माखनलाल ने यह जानकारी सार्वजनिक करने का निर्णय लिया. मनोज पासी को सुशील गौतम जैसे ही भ्रष्ट लोग आज साथ देते हुए दिखाई दे रहे है.


मनोज पासी न केवल संगठन के नाम पर समाज का पैसा खाता था बल्कि केवल संगठन को फर्जी बिल बनाकर देता था. यही नहीं तो उसने तो संगठन का सामान भी चुराया है. उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान मध्यांचल ज़ोन की परिवर्तन यात्रा मनोज पासी के नेतृत्व में निकाली गई थी. उसके लिए संगठन की एक स्कॉरपिओ गाडी और एक डाला गाड़ी किराए पर ली गई थी. उन दोनों गाड़ियों के ऊपर साऊंड स्पीकर की व्यवस्था भी की गई थी. जिसके लिए स्पीकर, मशीन, माईक और यह सब गाडी पर लगाने का साहित्य सब कुछ नया खरीदा गया था. यात्रा समाप्त होने के बाद मनोज पासी वह सारा सामान संगठन के पास जमा करना था, मगर उसने ऐसा नहीं किया. बल्कि वह दोनों गाड़ियां अपने घर लेकर गया और उन दोनों गाडियों पर लगा साऊंड सिस्टम निकालकर अपने घर में रखा और केवल गाडियां संगठन के पास दी. यह बात उसके साथ ड्राइवरी करने वाले संगठन के ही पूर्णकालिन प्रचारक ने हमें बताई है.


मनोज पासी केवल आर्थिक भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं था बल्कि वह संगठन विरोधी कारवाईयों में भी शामिल था. वह हमेशा ही संगठन विरोधी एवं राष्ट्रीय नेतृत्व विरोधी बयानबाजी करता था. राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा की मण्डल स्तरीय महारैलियों की समाप्ति का कार्यक्रम आगरा मंडल में 9 जनवरी 2022 को होने जा रहा था. उसमें कार्यकर्ता न आ पाए इसके लिए मनोज पासी कार्यकर्ताओं को फोन पर कह रहा था की ‘कार्यक्रम रद्द हो गया है, पुलिस ने परमिशन नहीं दी, आप मत आईए, आपको आना है तो अपनी सुरक्षा के साथ आईए.’ इस प्रकार से कार्यकर्ताओं को न केवल गलत संदेश देने का काम मनोज पासी कर रहा था, बल्कि कार्यकर्ताओं को ड़राने का भी काम करता था.


इसी महारैली के लिए 7 जनवरी को बहुत ही कम समय के नोटीस पर एक प्रेस वार्ता के आयोजन का आदेश संगठन के द्वारा डा.अनिल कुमार माने को प्राप्त हुआ. उन्होंने तुरंत ही इसकी तैयारी की और सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों को इसके लिए बुलाया. वहां पर मनोज पासी भी मौजूद था, मगर वह उस प्रेस वार्ता में शामिल नहीं हुआ. उसने बेहद ही बेतुका कारण उसके लिए दिया कि उसने अच्छे कपड़े नहीं पहने थे. उसके बाद कार्यकर्ताओं में प्रचार शुरु कर दिया कि ‘ये महाराष्ट्र के लोग ही आगे आ रहे है और हमें (उत्तर प्रदेश के लोगों को) पीछे धकेल दे रहे है.’ इतनी गलत धारणा और प्रांतीय सोच रखने वाला शायद ही कोई कार्यकर्ता किसी संगठन में हो सकता है.


जिस दिन महारैली होने वाली थी, उस दिन पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं का टकराव शुरू था. पुलिस भाजपा के इशारे पर वामन मेश्राम का कार्यक्रम होने देना नहीं चाहते थे. ऐसे स्थिति में पुलिस के साथ वार्ता करने का काम उत्तर प्रदेश के ही कार्यकर्ताओं को करना चाहिए था. वहां पुलिस के साथ मनोज पासी भी खड़ा था, लेकिन वह पुलिस के साथ किसी प्रकार की कोई वार्ता नहीं कर रहा था, जैसे मानो मनोज पासी भी भाजपा के ही इशारे पर काम कर रहा हो. पुलिस के साथ हो रहे टकराव के बीच वहां डॉ.अनिलकुमार माने और गौतम बनसोडे आ जाते है और पुलिस के साथ उनकी वार्ता होती है. वे पुलिस को समझाते है कि इस तरीके से कार्यक्रम लेना संविधान के मूलभूत अधिकार आर्टिकल 19 में है और कोई ताकत उन्हें कार्यक्रम करने से रोक नहीं सकती. इस बात पर पुलिस पीछे हट जाती है और राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा की महारैली सम्पन्न होती है.


महारैली के दिन ही वह सारे वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते है और देशभर के लोग डा.अनिलकुमार माने व गौतम बनसोडे की वाह-वाह करते है. इससे गुस्साए मनोज पासी फिर एक बार वहीं प्रचार करते है कि संगठन उत्तर प्रदेश में स्थानीय नेतृत्व का निर्माण होने देना नहीं चाहता. जब कि मनोज पासी को उस समय हिरो बनने का अच्छा मौका था. कार्यक्रम न होने देने के लिए मनोज पासी पुलिस को ही साथ सहयोग कर रहा था, ऐसे व्यक्ति को कार्यकर्ता तो नहीं बल्कि भगोडा और गांडू ही कहा जा सकता है.


बामसेफ विरोधी लालन (वी.एल.मातंग) और काले कहते है कि वह बामसेफ का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे. जब की लालन के ही कहने पर मनोज पासी और प्रदीप राम ने बामसेफ के बैनर तले समाजवादी पार्टी को यूपी के विधानसभा चुनाव 2022 में समर्थन देने के लिए प्रेस वार्ता ली थी. वह प्रेस वार्ता आज भी उनके फेसबुक पर उपलब्ध है. इसमें लालन की सोच ये थी की अगर सुबे में सपा की सरकार आती है तो उस पर चल रही केस ढ़ीली हो सकती है और उससे राहत मिल सकती है. इसलिए सरकार बनने से पहले ही सपा का समर्थन लालन के इशारे पर मनोज पासी व प्रदीप राम ने शुरु कर दिया. इसमें इन दोनों का ये मकसद था कि इस समर्थन के बदले में उन्हें विधानसभा या विधान परिषद की दो सीटें दी जाएंगी.


इसके लिए उन्होंने 1 फरवरी 2022 को मौलाना सज्जाद नोमानी के साथ एक बैठक की. जिसमें 18 लोग शामिल थे और उसी बैठक में संगठन के द्वारा कुछ लोगों को प्लांट भी किया गया था. लेकिन जब इन्होंने देखा की सरकार भाजपा की बन गई है तब उन्होंने संगठन तोड़ने कि प्रक्रिया शुरु कर दी. जो लालन ये कह रहा है कि हम बामसेफ का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे वही लालन उस वक्त बहुजन मुक्ति पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष था और उसी ने कमलाकांत काले का नाम बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सूचित किया था. बामसेफ के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी ने बामसेफ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया हो. लेकिन ये काम गद्दार लालन ने किया. कमलाकांत काले को केवल मात्र 11 लोगों ने अध्यक्ष माना, उनमें 2 लोग मनोज पासी और प्रदीप राम थे.


मनोज पासी का संगठन विरोधी काम इतना ही नहीं है. प्रेमकुमार गेडाम जिन्हें संगठन ने पश्चिमांचल ज़ोन की जिम्मेदारी दी थी, उनका तत्कालिन बामसेफ राज्य उपाध्यक्ष और वर्तमान राज्य कार्यकारी अध्यक्ष निरंजनजी के साथ तु-तु, मै-मै हो गई. यह बात मनोज पासी को पता चली. मनोज पासी अपने क्षेत्र का सारा काम छोड़कर निरंजनजी के घर पर आया और उसने संगठन विरोधी बातें शुरु की. रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक वह निरंजनजी को नेतृत्व व संगठन विरोधी बातें बता रहा था. 3 बजे के बाद निरंजनजी ने कहा कि अब हम सो जाते है. उतने में मनोज पासी ने कहा कि कुमार काले भी हमारे साथ है. इस पर निरंजनजी ने कहा कि कुछ भी मत कहो.


इसके बाद मनोज पासी ने सुबह तीन बजे कुमार काले को फोन किया और फोन को स्पीकर पर रखकर नेतृत्व व संगठन विरोधी बातें करने लगा. निरंजनजी को ये सारी बातें असहनीय हो गई और उन्होंने तुरंत ही संगठन के नोटीस में इन सभी बातों को लाने का काम किया. इसका मतलब ये है कि कुमार काले संगठन से 6 महीने की छुट्टी लेकर अपनी निजी समस्या का समाधान करने नहीं बल्कि संगठन विरोधी काम करने के लिए घर गया था. 

संकेत कांबले, मोबा.9004248821.

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