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25 मई को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के द्वारा ‘‘भारत बंद’’ का ऐलान, कई संगठनों ने दिया समर्थन, ट्विटर पर कर रहा है ट्रेंड

Published On :    24 May 2022   By : MN Staff
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बहुजन क्रांति मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक वामन मेश्राम ने भी 25 मई के भारत बंद को अपना समर्थन दिया है. इसके अलावा, लहुजी क्रांति मोचा, आरएमबीकेएस, इंपा, नफ, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा, राष्ट्रीय सिख मोर्चा, मोर्य क्रांति संघ, छत्रपति क्रांति सेना, राष्ट्रीय घुमंतु जनजाति मोर्चा, राष्ट्रीय किसान मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, राष्ट्रीय बेरोजगार और युवा मोर्चा सहीत कई संगठनों ने 25 मई के ‘‘भारत बंद’’ को अपना समर्थन दिया है. भारत बंदको सफल बनाने के लिए सोशल मीडिया पर जोरशोर से अभियान चलाया जार हा है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर ‘भी भारत’ बंद ट्रेंड कर रहा है.



नई दिल्ली : राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के द्वारा चुनाव में ईवीएम से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर, केंद्र सरकार द्वारा ओबीसी की जाति आधारित जनगणना करने, निजी क्षेत्रों में एससी- एसटी व ओबीसी को आरक्षण लागू न करने, किसानों को एमएसपी से जुड़ा कानून ना बनाया जाना, सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में आवाज उठाने, पुरानी पेंशन बहाल करने, लॉकडाउन में चुपके से मजदूरों के खिलाफ बनाए गए श्रम कानूनों का विरोध में, मध्य प्रदेश और ओडीशा में ओबीसी आरक्षण में सेपरेट इलेक्टोरेट लागू करने, पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आदिवासियों का विस्थापन रोकने और जबरण वैक्सीनेशन करने के विरोध में कल 25 में 2022 को ‘‘भारत बंद का ऐलान किया गया है. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने यह जानकारी दी है.


सूत्रों के अनुसार, जो लोग भारत बंद से जुड़ा ये कैंपेन सोशल मीडिया पर चला रहे हैं, उन्होंने 25 मई को लोगों से अपनी दुकानें और सार्वजनिक वाहन इत्यादि बंद करने की अपील की है और भारत बंद को सफल बनाने की अपील की जा रही है. बामसेफ के अलावा 25 मई को भारत बंद को बहुजन मुक्ति पार्टी सहीत कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया है. जहां पार्टी ने लोगों से बंद को सफल बनाने का आग्रह किया है. इसके अलावा, बहुजन क्रांति मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक वामन मेश्राम ने भी 25 मई के भारत बंद को अपना समर्थन दिया है. इसके अलावा, लहुजी क्रांति मोचा, आरएमबीकेएस, इंपा, नफ, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा, राष्ट्रीय सिख मोर्चा, मोर्य क्रांति संघ, छत्रपति क्रांति सेना, राष्ट्रीय घुमंतु जनजाति मोर्चा, राष्ट्रीय किसान मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, राष्ट्रीय बेरोजगार और युवा मोर्चा सहीत कई संगठनों ने 25 मई के ‘‘भारत बंद’’ को अपना समर्थन दिया है. भारत बंदको सफल बनाने के लिए सोशल मीडिया पर जोरशोर से अभियान चलाया जार हा है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर ‘भी भारत’ बंद ट्रेंड कर रहा है.


बहुजन क्रांति मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक ने वामन मेश्राम ने कहा, मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं अगले 25 तारीख को भारत बंद है. भारत बंद का मुख्य मुद्दा ओबीसी की जाति आधारित गिनती है. ओबीसी की जाति आधार गिनती के मुद्दे से एससी, एसटी और ओबीसी के लोगों का ध्यान दूसरी तरफ डायवर्ट करने के लिए ज्ञानवापी सहीत कई मस्जिदों का मामला खड़ा किया गया है. ताकि भारत बंद के तरफ लोगों का ध्यान ना जाए. उन्होंने कहा कि 25 तारीख के बाद यह सारे मस्जिद से संबंधित मामले ठंडे पड़ जाएंगे.


वामन मेश्राम ने कहा, टीवी पर ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिला ऐसा बताया जाता है. भारत में कभी कोई शिवलिंग पानी के फव्वारे में है ऐसा कोई उदाहरण भारत में और दुनिया में उपलब्ध नहीं है. मुगलों ने अपने काल में जो बुद्धिस्ट प्लेस था उसके साथ जो भी किया है उसे ब्राह्मणों का समर्थन था. इसलिए मुगलों ने बैठकर ब्राह्मणों का और मुगलों का दोनों का मंदिर और मस्जिद बनाया. अगर इसकी भी खुदाई कि तो सब मिल जाएगा.


राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने बीते शुक्रवार को कहा कि जब-जब पिछड़ा वर्ग अपने हक अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए सामने आया है तब-तब ब्राह्मणवादियों द्वारा उस लड़ाई को डाइवर्ट करने की कोशिश की गई. अभी 25 मई के भारत बंद को भी डाइवर्ट करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए हनुमान चालीसा, अजान, हिजाब या शिवलिंग विवाद का मामला उठाया जा रहा है. यह मुद्दे खड़े करने  के पीछे का मकसद ओबीसी को उसकी वास्तविक लड़ाई से भटकाने का मकसद है.


उन्होंने कहा, आजादी के 75 साल में देश में जानवरों, कुत्तों और हिजड़ों की गिनती हुई, मगर देश की आधी से अधिक आबादी ओबीसी कि अभी तक गिनती नही हुई. ओबीसी कि गिनती ना होने की वजह से पिछड़े वर्ग के लोगों की गिनती ब्राह्मण हिंदू के नाम पर करते रहे. इससे साड़ेतीन फीसदी ब्राह्मण पिछड़े वर्ग का समर्थन लेकर के बहुसंख्यक होते हैं देश की सत्ता और व्यवस्था पर कब्जा करते हैं और पिछड़े वर्ग को ही उनके हक अधिकार से वंचित करने का काम करते है.


चौधरी विकास पटेल ने कहा, यह पहली बार नहीं हो रहा है 1992 के दौर में भी पिछड़े वर्ग के लोग मंडल कमीशन की लड़ाई लड़ रहे थे. उस समय भी मंडल कमीशन की लड़ाई ध्यान हटाने के लिए बीजेपी, बजरंग दल, हिंदू परिषद के द्वारा बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि का मामला खड़ा किया गया था.

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