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महाराष्ट्र में 11 महीने में ही 2,498 किसानों ने कर ली आत्महत्या, कर्जमाफी योजना पर उठ रहे सवाल

Published On :    22 Jan 2022   By : MN Staff
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महाराष्ट्र सरकार ने हाल के वर्षों में लगातार दो बार कृषि कर्ज माफी की घोषणा की है. कर्ज माफी के बावजूद किसानों की आत्महत्या थम नहीं रही है.



मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने हाल के वर्षों में लगातार दो बार कृषि कर्ज माफी की घोषणा की है. कर्ज माफी के बावजूद किसानों की आत्महत्या थम नहीं रही है. अब महाराष्ट्र में जनवरी से नवंबर 2021 के बीच कुल 2,498 और साल 2020 में कर्ज में डूबे 2,547 किसानों ने आत्महत्या करने बात सामने आई है. आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे ने राज्य सरकार से आरटीआई के जरिए ये जानकारी मांगी थी. वे कहते हैं, कई कर्जमाफी और योजनाओं के बाद भी किसानों की आत्महत्या के मामलों में कमी नहीं आ रही है.


राज्य के राजस्व विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार की कर्ज माफी योजनाओं के बावजूद किसान कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं जिस वजह से आत्महत्या के मामले नहीं रुक रहे हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो आत्महत्या करने वाले सबसे ज्यादा किसान औरंगाबाद क्षेत्र के हैं. 2021 में 11 महीने की अवधि में 804 किसानों ने मौत को गले लगा लिया. नागपुर संभाग में ऐसे 309 मामले दर्ज किए गए. पिछले दो वर्षों में कोंकण संभाग में एक भी आत्महत्या नहीं हुई.


राज्य में लगभग 50 फीसदी आत्महत्याओं के साथ विदर्भ हमेशा सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा है. 2020 की अपेक्षा आत्महत्याओं के मामले में अमरावती जिला (331) ने यवतमाल (270) को पीछे छोड़ दिया है. ’द यंग व्हिसलब्लोअर फाउंडेशन’ के घाडगे ने कहा, किसानों के मानसिक स्वास्थ्य पहलू की अनदेखी करना और सभी को सिर्फ कर्जमाफी दे देने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा. संकटग्रस्त किसानों को छांटना महत्वपूर्ण है ताकि उन लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.


शिवाजी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख ज्ञानदेव तालुले ने कहा कि मराठवाड़ा और विदर्भ की जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए अनाज, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है. अपने दिसंबर 2021 के शोध पत्र ‘द साइन ऑफ़ परसिस्टेंट एग्रेरियन डिस्ट्रेस; सुसाइड बाय महाराष्ट्र फार्मर्स’ में उन्होंने कहा है, अतीत में सरकारी राहत पैकेजों के प्रभाव अल्पकालिक थे और लंबे समय में समस्याओं का समाधान नहीं कर सके. 


इन पैकेजों के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार भी हुआ. राज्य की 1 लाख रुपए की राहत के तहत औसतन केवल 50 फीसदी किसानों के परिजन ही मुआवजे के लिए पात्र पाए गए. घाडगे ने कहा कि 15 साल पहले तैयार किए गए पुराने नियम केवल उन्हीं परिजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं जिन्होंने राष्ट्रीयकृत बैंक से कर्ज लिया है.


महाविकास अघाड़ी सरकार ने सत्ता में आने के बाद 2 लाख रुपए तक की पूरी कर्ज माफी का वादा किया था. अगर दो लाख रुपये से ज्यादा के कर्ज वाला किसान अतिरिक्त राशि का पुनर्भुगतान करता है, तो उसे दो लाख रुपए की छूट मिलेगी. जबकि जो किसान नियमित तौर पर अपने बकाया को चुकाते हैं, उन्हें 50,000 रुपए का मुआवजा दिया जाएगा.


महाराष्ट्र में जनवरी से नवंबर 2020 के बीच कुल 2270 किसानों ने आत्महत्या की थी. साल 2019 में 2,566 किसानों ने सुसाइड कर लिया था. आत्महत्या किए 2270 किसानों में से 920 किसान मुआवजे के हकदार थे. इनमें आधे से ज्यादा किसान विदर्भ क्षेत्र के थे. इस इलाके से तकरीबन 1,230 किसानों ने अपना जीवन समाप्त कर लिया था. मराठवाड़ा के सूखे इलाके वाली जगहों पर 693 किसानों ने जबकि उत्तर महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 322 का था.


अक्टूबर 2021 में आई 2020 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या रुकने की बजाय बढ़ रही है. कुल मिलाकर देश में 2020 के दौरान कृषि क्षेत्र में 10,677 लोगों की आत्महत्या की जो देश में कुल आत्महत्याओं (1,53,052) का 7 फीसदी है. इसमें 5,579 किसान और 5,098 खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या शामिल हैं. 4,006 आत्महत्याओं के साथ महाराष्ट्र सबसे आगे रहा.
 

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