×

कभी ऐसी सरकार नहीं देखी जो बेशर्मी से संसद के सामने झूठ बोलती हो, येचुरी का हमला

Published On :    31 Jul 2021   By : MN Staff
साझा करें:

पिछले पांच साल के दौरान हाथ से मैला साफ़ करने वाले किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है. केंद्र सरकार ने संसद में यह जानकारी दी. राज्यसभा में दिए गए इस जवाब की वजह से विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार को घेरा है.



नई दिल्ली : पिछले पांच साल के दौरान हाथ से मैला साफ़ करने वाले किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है. केंद्र सरकार ने संसद में यह जानकारी दी. राज्यसभा में दिए गए इस जवाब की वजह से विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार को घेरा है. केंद्र सरकार के इस जवाब पर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार को झूठा बताते हुए हमला बोला है. सीताराम येचूरी ने निशाना साधते हुए कहा कि देश ने कभी ऐसी सरकार नहीं देखी जो बेशर्मी से संसद के सामने झूठ बोलती हो.


राज्यसभा के एक सवाल के जवाब में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि हाथ से मैला उठाने वाले 66,692 लोगों की पहचान हुई है. यह सवाल पूछे जाने पर कि हाथ से मैला ढोने वाले ऐसे कितने लोगों की मौत हुई है इस पर उन्होंने कहा, हाथ से सफाई के कारण किसी के मौत होने की सूचना नहीं है. सरकार हाथ से मैला सफाई के कारण मौत को मान्यता नहीं देती और इसके बजाय इसे खतरनाक तरीके से शौचालय टैंक एवं सीवर की सफाई के कारण मौत बताती है.


राज्यसभा में दिए गए इस बयान पर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार निशाने पर लिया. सीताराम येचुरी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि भारत ने कभी ऐसी केंद्र सरकार नहीं देखी जो बेशर्मी से संसद के सामने झूठ बोलती हो. यूचुरी ने उनके ही मंत्री का पुराना बयान याद दिलाया. फरवरी के बजट सत्र में केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा को सूचित किया था कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस प्रतिबंधित कुप्रथा के कारण 340 मौतें हुई हैं. अपने ट्वीट में उन्होंने हाथ से मैला ढ़ोने वाली प्रथा को बंद करने की भी मांग की.


संसद के पिछले सत्र के दौरान दस मार्च को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा था, हाथ से मैला साफ करने के कारण किसी की मौत नहीं हुई. बहरहाल, शौचालय टैंक या सीवर की सफाई के दौरान लोगों के मौत की खबर है। रामदास अठावले के द्वारा राज्यसभा में दिए गए जवाब पर सफाई कर्मचारियों के संगठन ने भी ऐतराज जताया है.



यह भी पढ़े : सीएम धामी के स्वागत समारोह के दौरान गुरबाणी को रोक छात्राओं से कराया नृत्य, मचा हंगामा



सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि मंत्री ने खुद ही स्वीकार किया था कि सीवर की सफाई के दौरान 340 लोगों की मौत हुई है. साथ ही उन्होंने पीटीआई से कहा कि वह तकनीकी रूप से बयान दे रहे हैं और हाथ से मैला सफाई को सूखा शौच बता रहे हैं. इसलिए उन्हें अपने बयान में स्पष्ट रूप से जिक्र करना चाहिए कि सूखे शौच से लोगों की मौत नहीं हो सकती है बल्कि शौचालय के टैंक के कारण लोगों की मौत होती है. सरकार हर चीज से इंकार कर रही है और इसी तरह हाथ से मैला सफाई के कारण होने वाली मौत से भी इंकार कर रही है.


बता दें कि देश में पिछले 10 वर्षों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 631 लोगों की जान गई है. आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में यह जानकारी दी गई है. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने सीवर और सेप्टिक टैकों की सफाई के दौरान 2010 से मार्च 2020 के बीच हुई मौतों के संबंध में आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, इस अवधि में 631 लोगों की मौत हुई. इनमें से सबसे ज्यादा 115 लोगों की मौत 2019 में हुई.


मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने की दिशा में काम करने वाले संगठन सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि कानून सही तरीके से लागू नहीं होने से सफाईकर्मी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, मैला ढोना रोजगार निषेध व पुनर्वास अधिनियम के तहत किसी एक भी व्यक्ति को अब तक सजा नहीं मिली है. अधिनियम चुनावी घोषणा पत्र के वादों की तरह झूठे वादे नहीं होने चाहिए.


दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच के सचिव संजीव कुमार का कहना है कि कानून का क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा, सीवर या सेप्टिक टैंक के भीतर किसी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए और इस काम में मशीन को लगाया जाना चाहिए.

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
आईसीएमआर ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए छिपाए
बीजेपी चला रही झूठ बोलने का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण केंद्
गुजरात भाजपा में घमासान, पूरी कैबिनेट बदलना चाहते हैं भू
सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी को पदोन्नति में आरक्षण पर दोब
कोविड के दौरान लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था तो क्या सरकार भी देशद
आधे किसान परिवारों पर कर्ज का बोझ : सर्वे
संघ से करीबी रखने वाले के हाथ जा सकती है डीयू की कमान, राष्
यूपी में वायरल बुखार से कोहराम- फिरोजाबाद में स्थिति गंभ
हाईकोर्ट ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को किया खारिज, क
कुपोषण से मौत रोकने के लिए क्या क़दम उठाए, हाईकोर्ट की ठाकर
पेगासस मामले में विस्तृत हलफनामा दायर करने से केंद्र का
तमिलनाडु विधानसभा में नीट को रद्द करने वाला विधेयक पारित
एमपी में शिक्षा का ब्राह्मणीकरण : कॉलेजों में अब पढ़ाया जा
लिंगायत आरक्षण का करे एलान, वरना एक अक्टूबर से सत्याग्रह,
अमेरिका में ब्राह्मणी विचारधारा के खिलाफ हुए सम्मेलन पर
भाजपा में शामिल होने के लिए दी गई थी पैसे की ऑफर, कर्नाटक क
यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर में लगे प्रतिबंध
बीजेपी और आरएसएस के गुप्त सर्वे में बीजेपी को हारता देख ब
स्विट्जरलैंड में कालाधन रखने वालों की खुलेगी पोल, केंद्र
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अयोग्य घोषित करन
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper