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आंदोलन के दबाव में आकर नीट में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू करने का केंद्र का फैसला : चौधरी विकास पटेल

Published On :    30 Jul 2021   By : MN Staff
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ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना और नीट में ओबीसी के लिए 27 आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर यूपी में राष्ट्रीय पिछड़ा मोर्चा की परिवर्तन यात्रा पिछले कई दिनों से जारी है. इस परिवर्तन यात्रा से ओबीसी में जागृति बढ़ती जा रही थी.



नई दिल्ली : ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना और नीट में ओबीसी के लिए 27 आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर यूपी में राष्ट्रीय पिछड़ा मोर्चा की परिवर्तन यात्रा पिछले कई दिनों से जारी है. इस परिवर्तन यात्रा से ओबीसी में जागृति बढ़ती जा रही थी. यही वजह रही होगी कि केंद्र सरकार ने नीट में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का फैसला लिया है. चौधरी विकास पटेल ने कहा है कि आंदोलन के दबाव में आकर सरकार ने यह फैसला लिया है.


सरकार के इस फैसले पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने अधिकृत ट्विटर पर लिखा आंदोलन के दबाव में आकर मोदी सरकार को नीट के अखिल भारतीय कोटे में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण लागू करने का फैसला किया है. ये ओबीसी में बढ़ती जागरूकता का सुखद परिणाम है. आगे भी ओबीसी को जगाने एंव जाति आधारित गिनती एवं संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी की लड़ाई जारी रहेगी.


आरक्षण शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से स्नातक स्नातकोत्तर मेडिकल/डेंटल कोर्स (एमबीबीएस, एमडी, एमएस, डिप्लोमा, बीडीएस, एमडीएस) के लिए प्रदान करने का फैसला लिया गया है. सरकार के इस फैसले से मेडिकल और डेंटल शिक्षा में प्रवेश के लिए ओबीसी और ईडब्ल्यूएस से आने वाले 5550 छात्र लाभान्वित होंगे. इससे हर साल 1500 ओबीसी (एमबीबीएस में), 2500 ओबीसी छात्रों को  पोस्ट ग्रेजुएशन में फायदा होगा. वहीं हर साल एमबीबीएस में 550 ईडब्ल्यूएस और पोस्ट ग्रेजुएशन में 1000 ईडब्ल्यूएस छात्रों को फायदा होगा.


स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से यूजी और पीजी मेडिकल व डेंटल कोर्स (एमबीबीएस/एमडी/एमएस/डिप्लोमा/बीडीएस/एमडीएस) के लिए ऑल इंडिया कोटा योजना में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला  लिया है. इसका फायदा ऑल इंडिया कोटा स्कीम (  एआईक्यू ) के तहत किसी भी राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थान से लिया जा सकेगा. केंद्र के संस्थानों में यह पहले से लागू है.


शुरू में 2007 तक आईक्यू योजना में कोई आरक्षण नहीं था. 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना में एससी के लिए 15 प्रतिशत और एसटी के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की. जब 2007 में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान एक्ट प्रभावी हुआ, तो ओबीसी को एक समान 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. इसे सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया गया था. 


हालांकि इसे राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की एआईक्यू सीटों पर लागु नहीं किया गया था. अब इस फैसले से एमबीबीएस में 1500 स्नातकोत्तर में 2500 ओबीसी विद्यार्थी डॉक्टर बनने का रास्ता साफ हो गया है. बता दें कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में मौजूद कुल सीटों में से अंडर ग्रेजुएट की 15 फीसदी और पोस्ट ग्रेजुएट की 50 फीसदी सीटें एआईक्यू कोटा में आती है.


इस क्रम में, अतिरिक्त 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण को समायोजित करने के लिए 2019-20 2020-21 के दौरान दो साल में मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ा दी गई, जिससे अनारक्षित श्रेणी के लिए उपलब्ध सीटों की कुल संख्या में कमी न आए. हालांकि, एआईक्यू सीटों में अभी तक यह लाभ नहीं दिया गया है. 


इसलिए, वर्तमान शैक्षणिक वर्ष2021-22 से सभी स्नातक/स्नातकोत्तर मेडिकल/डेंटल कोर्सों में एआईक्यू सीटों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ, ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. इससे एमबीबीसी के लिए 550 से ज्यादा ईडब्ल्यूएस विद्यार्थी पीजी मेडिकल कोर्सों के लिए लगभग 1000 ईडब्ल्यूएस विद्यार्थी हर साल लाभान्वित होंगे. पिछले छह साल के दौरान, देश में एमबीबीएस की सीटें 2014 की 54,348 से 56 प्रतिशत बढ़कर 2020 में 84,649 हो गई और पीजी सीटों की संख्या 2014 की 30,191 से 80 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 54,275 हो गई है.

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