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कालाधन वापस लाने के दावे की निकली हवा, स्विस बैंक में 27 हजार करोड़ तक बढ़ा भारतीयों पैसा

Published On :    18 Jun 2021   By : MN Staff
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साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी विदेशी काला धन वापस लाकर गरीब परिवार के खाते में 15 लाख देने का वादा कर सत्ता में आये थे. अब जो खबर सामने आ रही है उससे यही लगता है कि सरकार विदेशी कालाधन वापिस तो नहीं ला सकीं बल्कि यह धन जरूर बढ़ गया है.



नई दिल्ली : साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी विदेशी काला धन वापस लाकर गरीब परिवार के खाते में 15 लाख देने का वादा कर सत्ता में आये थे. अब जो खबर सामने आ रही है उससे यही लगता है कि सरकार विदेशी कालाधन वापिस तो नहीं ला सकीं बल्कि यह धन जरूर बढ़ गया है. 


स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा 2020 में बढ़कर 20,700 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है. यह बढ़ोतरी नकद जमा के तौर पर नहीं बल्कि प्रतिभूतियों, बॉन्ड समेत अन्य वित्तीय उत्पादों के जरिए रखी गई होल्डिंग से हुई है. स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक की ओर से गुरुवार को यह जानकारी दी गई है.


स्विस बैंकों में यह कोष भारत स्थित शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए रखे गए हैं. स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों का कुल धन 2019 के अंत में 6,625 करोड़ रुपए था, जो 2020 में बढ़कर 20,632 करोड़ रुपए तक पहुंच गया. ताजा आंकड़ा 13 साल का सर्वाधिक है. 


स्विस नेशनल बैंक के आंकड़े के अनुसार 2006 में यह करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकार्ड स्तर पर था. उसके बाद इसमें 2011, 2013 और 2017 को छोड़कर गिरावट आयी. एसएनबी के मुताबिक, 2020 के अंत में भारतीय ग्राहकों के मामले में स्विस बैंकों की कुल देनदारी 255.47 करोड़ स्विस फ्रैंक है. इसमें 50.9 करोड़ स्विस फ्रैंक यानी 4,000 करोड़ रुपए से अधिक ग्राहक जमा के रूप में है.


वहीं, 38.3 करोड़ स्विस फ्रैंक यानी 3,100 करोड़ रुपए से ज्यादा अन्य बैंकों के जरिए रखे गये हैं. न्यास के जरिये 20 लाख स्विस फ्रैंक यानी 16.5 करोड़ रुपए जबकि सर्वाधिक 166.48 करोड़ स्विस फ्रैंक यानी करीब 13,500 करोड़ रुपए बॉन्ड, प्रतिभूति और अन्य वित्तीय उत्पादों के रूप में रखे गए हैं.



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बैंक ने कहा कि ग्राहक खाता जमा के रूप में वर्गीकृत कोष वास्तव में 2019 की तुलना में कम हुआ है. वर्ष 2019 के अंत में यह 55 करोड़ स्विस फ्रैंक था. ट्रस्ट के जरिए रखा गया धन भी 2019 में 74 लाख स्विस फ्रैंक के मुकाबले पिछले साल आधे से भी कम हो गया है. हालांकि, दूसरे बैंकों के माध्यम से रखा गया कोष 2019 के 8.8 करोड़ स्विस फ्रैंक के मुकाबले तेजी से बढ़ा है.


ये आंकड़े बैंकों ने एसएनबी को दिये हैं और फिलहाल इसके जरिए भारतीयों द्वारा स्विट्जरलैंड के बैंकों में रखे जाने वाले काले धन के बारे में कोई पुख्ता संकेत नहीं मिलते. इन आंकड़ों में वह राशि भी शामिल नहीं है जो भारतीय, प्रवासी भारतीय या अन्य तीसरे देशों की इकाइयों के जरिये स्विस बैंकों में रख सकते हैं.


एसएनबी के अनुसार उसका आंकड़ा भारतीय ग्राहकों के प्रति स्विस बैंकों की कुल देनदारी को बताता है. इसके लिये स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों के सभी प्रकार के कोषों को ध्यान में रखा गया है. इसमें व्यक्तिगत रूप से, बैंकों और कंपनियों से प्राप्त जमा शामिल हैं. इसमें भारत में स्विस बैंकों की शाखाओं से प्राप्त आंकड़े गैर-जमा देनदारी के रूप में शामिल हैं.


कुल मिलाकर स्विस बैंकों में विभिन्न देशों के ग्राहकों की जमा राशि 2020 में बढ़कर करीब 2,000 अरब स्विस फ्रैंक पहुंच गई. इसमें से 600 अरब स्विस फ्रैंक विदेशी ग्राहकों की जमा राशि है. सूची में 377 अरब स्विस फ्रैंक जमा के साथ ब्रिटेन अव्वल है. उसके बाद अमेरिका के (152 अरब स्विस फ्रैंक) का स्थान है.



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शीर्ष 10 में अन्य वेस्टइंडीज, फ्रांस, हांगकांग, जर्मनी, सिंगापुर, लक्जमबर्ग, केमैन आईलैंड और बहामास हैं. भारत इस सूची में 51वें स्थान पर है और न्यूजीलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, हंगरी, मॉरीशस, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा श्रीलंका जैसे देशों से आगे है. आंकड़े के अनुसार स्विस बैंकों में ब्रिटेन, अमेरिका के ग्राहकों का धन कम हुआ. बांग्लादेश के भी ग्राहकों का धन घटा, लेकिन पाकिस्तानी ग्राहकों का कोष दोगुना होकर 64.20 करोड़ स्विस फ्रैंक हो गया. 


इस बीच, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (बीआईएस) के आंकड़े के अनुसार 2020 में इस प्रकार का कोष 39 प्रतिशत बढ़कर 12.59 करोड़ डॉलर (932 करोड़ रुपए) पहुंच गया. स्वीस बैंक इस रिपोर्ट ने काले धन पर अंकुश लगाने के मोदी सरकार के दावे कि हवा निकाल दी है. इसके पूर्व पीएम मोदी कहते थे की हर काले धन वालों का पता मेरे पास है, लेकिन उसके बाद में हुई मन की बात में पीएम मोदी अपने ही बयान से पलट गए थे, और कहा था कि विदेश में कितना काला धन है मुझे पता नहीं है.

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