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त्रिपुरा में भी बीजेपी को लग सकता है बड़ा झटका, मुकुल रॉय तोड़फोड़ कर गिरा सकते हैं सरकार

Published On :    18 Jun 2021   By : MN Staff
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हाल में बीजेपी को छोड़कर मुकुल रॉय ने तृणमूल में घरवापसी कर ली है. जिसके बाद ये अटकलें तेज हो चुकी हैं कि बंगाल के साथ साथ त्रिपुरा में भी कई भाजपा नेता पार्टी को अलविदा कह टीएमसी में शामिल हो सकते है. हालांकि भाजपा ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है.



कोलकाता : हाल में बीजेपी को छोड़कर मुकुल रॉय ने तृणमूल में घरवापसी कर ली है. जिसके बाद ये अटकलें तेज हो चुकी हैं कि बंगाल के साथ साथ त्रिपुरा में भी कई भाजपा नेता पार्टी को अलविदा कह टीएमसी में शामिल हो सकते है. हालांकि भाजपा ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है.


बंगाल में तो टीएमसी का दावा है कि रॉय के करीबी 30 विधायक पार्टी में वापस आना चाहते हैं. वहीं बंगाल में हुए इस बदलाव का असर त्रिपुरा में देखने को मिल सकता है. रॉय के वफादार सुदीप रॉय बर्मन  भी टीएमसी नेता के साथ भाजपा में चले गए थे. अब जब रॉय वापस टीएमसी में आ गए हैं तो भाजपा इस बात को लेकर आशंकित है कि कहीं बर्मन भी अपने पुराने दल में ना चले जाए.


बंगाल के सियासी गलियारों में चर्चा है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के साथ विवादों के चलते सुर्खियों में रहने वाले बर्मन अगर टीएमसी में वापस आए तो त्रिपुरा में सत्ताधारी भाजपा से कुछ विधायक भी उनका साथ दे सकते हैं. त्रिपुरा में एक प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती माने जाने वाले बर्मन मुख्यमंत्री पद के लिए देब को चुनने के बाद से भाजपा से नाखुश बताए जाते हैं. वह कांग्रेस में रहते हुए विपक्ष के नेता थे और भाजपा में शामिल होने से पहले लगभग एक साल तक तृणमूल कांग्रेस के साथ रहे थे.



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सूत्रों ने कहा कि बर्मन तृणमूल कांग्रेस में लौटने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अगर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसकी मंजूरी नहीं दी तो वह अपना खुद का संगठन बना सकते हैं और आगामी स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार उतार सकते हैं. उन्होंने पहले ही ‘बंधुर नाम सुदीप’ नाम का एक संगठन बना लिया है जो राज्य में बीजेपी का विरोध शुरू कर सकता है.


इस मामले में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती का भी बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत दोबारा अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में जुट चुकी है. लेकिन पश्चिम बंगाल की तरह त्रिपुरा में पार्टी की पकड़ मजबूत नहीं है. इसलिए यहां तृणमूल कांग्रेस अपनी पैठ नहीं बना पाएगी. वहीं तृणमूल कांग्रेस के त्रिपुरा प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंघा ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ मिलकर त्रिपुरा में संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए तैयार है. जल्द ही कुछ नेताओं को त्रिपुरा में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए भेजा जाएगा.


राजनीतिक सूत्रों की माने तो भाजपा के पूर्व नेता मुकुल रॉय के 4 साल बाद तृणमूल कांग्रेस में वापस आने के बाद त्रिपुरा में भी सियासी घटनाक्रम बदलने के आसार बन रहे हैं. दरअसल मुकुल रॉय जब तृणमूल कांग्रेस में थे तो पार्टी के संगठनात्मक मामलों को देखने के लिए अक्सर त्रिपुरा के दौरे पर रहते थे. इसलिए त्रिपुरा में उनकी अच्छी-खासी राजनीतिक पकड़ बनी हुई है.
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