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महाकुंभ के दौरान हुए कोरोना टेस्टिंग के फर्जीवाड़ा में एफआईआर दर्ज करने का आदेश

Published On :    17 Jun 2021   By : MN Staff
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित किए गए महाकुंभ में लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे थे. जिसके बाद महाकुंभ में कई लोग कोरोना संक्रमित भी पाए गए थे.



हरिद्वार : कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित किए गए महाकुंभ में लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे थे. जिसके बाद महाकुंभ में कई लोग कोरोना संक्रमित भी पाए गए थे. अब कुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग जांच का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद प्रदेश सरकार की चारो ओर आलोचना और किरकीरी हो रही है.


इस आलोचनाओं से बचने के लिए अब राज्य सरकार ने हरिद्वार में पांच स्थानों पर टेस्ट करने वाली दिल्ली और हरियाणा की लैब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी किया गया है. राज्य सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया कि सरकार ने हरिद्वार ज़िला प्रशासन को बुधवार को महाकुंभ के दौरान हुए कोरोना टेस्टिंग घोटाले की जांच के लिए रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया है.


हरिद्वार में इस साल मार्च-अप्रैल में लगे कुंभ मेले के दौरान कई लोग कोरोना पॉजीटिव हो गए थे. आम लोगों के अलावा कई साधु-संन्यासी और प्रशासनिक अधिकारी, पुलिसकर्मी भी कोविड की चपेट में आ गए थे. इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था. लोगों की मांग थी कि कुंभ मेला को रोक दिया जाए, हालांकि कुंभ मेला आधे-अधूरे ढंग से पूरा बीत गया. हालांकि कोरोना वायरस बीमारी की वजह से लोगों में सरकार के खिलाफ आक्रोश भी रहा.


इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के दौरान कोरोनावायरस की फर्जी टेस्ट रिपोर्ट जारी करने के आरोपों पर जांच बिठा दी थी. दरअसल, जिस प्राइवेट लैब को कुंभ में बड़े स्तर पर रैंडम टेस्टिंग की जिम्मेदारी दी गई थी, उस पर ही गलत परीक्षण करने का आरोप लगा है. इसके बाद कई और प्राइवेट लैब्स भी फर्जी टेस्टिंग कराने के मामले में घिरी हैं.


इस साल कोरोनावायरस की दूसरी लहर आने के बावजूद एक अप्रैल से 30 अप्रैल लाखों लोग कुंभ मेले में हिस्सा लेने हरिद्वार, देहरादून, टिहरी और पौड़ी जिले पहुंचे थे. बताया गया है कि फर्जी टेस्टिंग का यह मामला तब खुला जब पंजाब के रहने वाले एक शख्स ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को ई-मेल लिखकर शिकायत की. सूत्रों के मुताबिक, यह व्यक्ति कुंभ के दौरान अपने घर में ही रह रहा था. इसके बावजूद उसके पास मैसेज आया कि कोरोना टेस्टिंग के लिए उसका सैंपल लिया गया है.


जानकारी के मुताबिक, शख्स ने इस घटना की शिकायत आईसीएमआर से की और कहा कि उसके आधार और मोबाइल नंबर का फेक टेस्ट के लिए गलत इस्तेमाल हो रहा है. बाद में आईसीएमआर ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अफसर को इसकी जानकारी दी. बताया गया है कि उत्तराखंड के इस अफसर ने कुंभ मेले में टेस्टिंग की जिम्मेदारी निभाने वाली प्राइवेट लैब की रिपोर्ट्स की जांच की. जब शुरुआती जांच में ही लैब की ओर से कई और लोगों को फर्जी रिपोर्ट्स देने की बात सामने आई, तब उन्होंने मामले में विस्तृत जांच के आदेश दिए.


सबसे बड़े फर्जीवाड़े की ये है कि एक ही घर से 530 सैम्पल लिए गए. जांच से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, पते और नाम फर्जी थे. हरिद्वार में हाउस नंबर 5 से ही लगभग 530 सैंपल लिए गए. क्या एक ही घर में 500 से अधिक लोग रह सकते हैं? उन्होंने बताया कि फोन नंबर भी फेक थे और कानपुर, मुंबई, अहमदाबाद और 18 अन्य जगहों के लोगों ने एक ही फोन नंबर शेयर किए.


ये भी बताया गया कि एजेंसी में रजिस्टर्ड करीब 200 नमूना संग्राहक छात्र और डेटा एंट्री ऑपरेटर या राजस्थान के निवासी निकले, जो कभी हरिद्वार ही नहीं गए थे. सैंपल लेने के लिए एक सैंपल कलेक्टर को शारीरिक रूप से मौजूद होना पड़ता है. एक अफसर ने बताया कि जब हमने एजेंसी के साथ रजिस्टर्ड सैंपल कलेक्टर्स से संपर्क किया, तो हमने पाया कि उनमें से 50 फीसदी राजस्थान के निवासी थे, जिनमें से कई छात्र या डेटा एंट्री ऑपरेटर थे.
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