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कोरोना काल में बैंकों द्वारा दिए गये नगद को सोख लिए जाने से बढ़े दुनिया में अरबपति

Published On :    16 May 2021   By : MN Staff
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बढ़ते कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्रीय बैंकों ने 675 लाख करोड़ रुपए दुनिया की अर्थव्यवस्था में झोंक दिए, ताकि वो डूबे नहीं.



नई दिल्ली: पिछले साल से जारी कोरोना संकट की मार कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ी है. इसके चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है.लेकिन इसी काल में पिछले कुछ महीनों में एक चौंकाने वाली खबर आई थी. खबर यह थी कि कोरोना संकट के दौरान भारत सहीत दुनिया में अमीरों की संपत्ति में बढ़ोत्तरी हुई है.अब इस खबर का खुलसा हो गया है. कहा जा रहा है की कोरोना संकट को बढ़ते देख केंद्रीय बैकों ने कई लाख करोड़ रूपए दिए. इसका ज्यादातर हिस्सा अमीरों के पास जाने से देश और दुनिया में अरबपतियों की संख्या बढ़ी है.


हिंदी अखबार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्रीय बैंकों ने 675 लाख करोड़ रुपए दुनिया की अर्थव्यवस्था में झोंक दिए, ताकि वो डूबे नहीं. इस अनुदान राशि का बड़ा हिस्सा फाइनेंशियल मार्केट से होते हुए ऐसे लोगों के पास पहुंचा जो पहले ही अमीर हैं. यही वजह हैं कि एक साल के अंदर दुनिया के अरबपतियों की कुल संपत्ति 375 लाख करोड़ से बढ़कर 975 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई. 2021 की फोर्ब्स लिस्ट के अनुसार, 6 अप्रैल तक दुनिया के अरबपतियों की संख्या 2000 से बढ़कर 2700 पर पहुंच गई, जो अब तक की सबसे तेज बढ़त दर है.


अकेले चीन में 238 नए अरबपति जुड़ गए. अमेरिका में ये संख्या 110 के इजाफे के साथ 724 पर पहुंची और भारत में 38 के इजाफे के साथ संख्या 140 हो गई. टेस्ला के एलोन मस्क की हैसियत 1.875 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर एक साल में ही 11.25 लाख करोड़ रुपए हो गई. 2010 में अमेरिका के अरबपतियों की कुल संपत्ति अमेरिका के जीडीपी का 10 फीसदी था जबकि भारत में ये आंकड़ा 17 फीसदी था जो दुनिया में सबसे अधिक था. ये आंकड़ा सबसे अधिक स्वीडन में है जहां एक साल में ही 31 से बढ़कर 41 अरबपति हो गए हैं. फ्रांस में भी अरबपतियों की संपत्ति जीडीपी के 11 फीसदी से बढ़कर 17 फीसदी हो गई है. भारत की बात करे तो देश की जीडीपी का 2.7 फीसदी हिस्सा मुकेश अंबानी और
1.7 फीसदी गौतम अडानी के पास है.


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टॉप पर काबिज मैक्सिको में अमीरों का जीडीपी में हिस्सा 75 फीसदी हो गया है. रूसी अमीरों का जीडीपी में 60 फीसदी हिस्सा है. भारत तीसरे नंबर पर है. यहां जीडीपी में अमीरों का हिस्सा 20 फीसदी है पर इनमें 55 फीसदी की हिस्सेदारी परिवारवादी घरानों की है. टॉप 10 उभरती और 10 विकसित अर्थव्यवस्थाओं का आंकड़ा मूल्यांकन के लिए लिया गया है. अरबपतियों की संपत्ति को देश के जीडीपी के साथ तुलना करने के बाद ये देखा जाता है कि किन देशों में परिवारवादी अमीरों की हिस्सेदारी ज्यादा है और कहां सेल्फमेड अरबपतियों की. भविष्य में कौन-सा देश शांत रहेगा और कहां आक्रोश आंदोलन की शक्ल लेगा.


बता दें कि कोरोना महामारी ने भारत में मौजूदा असमानताओं को और गहरा कर दिया है. ‘द इनइक्वैलिटी वायरस’ नाम की इस रिपोर्ट में पता चला था कि कोरोना की वजह से बड़ी संख्या में गरीब भारतीय बेरोजगार हो गए हैं, वहीं रिपोर्ट में कहा गया था कि ‘लॉकडाउन के दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 35 फीसदी बढ़ी है और 2009 से इन अरबपतियों की संपत्ति 90 फीसदी बढ़कर 422.9 अरब डॉलर हो गई है, जिसके बाद भारत अरबपतियों की संपत्ति के मामले में विश्व में छठे स्थान पर पहुंच गया है.


ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, जब से केंद्र सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया. भारत के शीर्ष 100 अरबपतियों की संपत्ति 12.97 ट्रिलियन बढ़ी है. यह धनराशि इतनी अधिक है कि इससे देश के 13.8 करोड़ गरीब भारतीयों में से हरेक को 94,045 रुपये का चेक दिया जा सकता है. रिपोर्ट में आय की असमानता का जिक्र करते हुए बताया गया था कि महामारी के दौरान मुकेश अंबानी को एक घंटे में जितनी आमदनी हुई, उतनी कमाई करने में एक अकुशल मजदूर को दस हजार साल लग जाएंगे, या मुकेश अंबानी ने जितनी आय एक सेकेंड में हासिल की, उसे पाने में एक अकुशल मजदूर को तीन साल लगेंगे.


रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी, शिव नादर, सायरस पूनावाला, उदय कोटक, अजीम प्रेमजी, सुनील मित्तल, राधाकृष्ण दमानी, कुमार मंगलम बिरला और लक्ष्मी मित्तल जैसे अरबपतियों की संपत्ति मार्च 2020 के बाद महामारी और लॉकडाउन के दौरान तेजी से बढ़ी. हो सकता है कि केंद्र सरकार की और से जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई थी उसका ज्यादातर हिस्सा भारतीय अरबपतियों के पास गया हो. इससे इनकार नहीं किया जा सकता. 

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