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पंजाब में गेहूं खरीद को लेकर असमंजस : डीबीटी के विरोध में आढ़तियों ने खोला मोर्चा

Published On :    11 Apr 2021   By : MN Staff
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पंजाब में गेहूं-धान की खरीद आढ़तिया (कमीशन एजेंट) के माध्यम से होती है. यही आढ़तिया किसानों को उनकी फसल का भुगतान भी करते हैं.



हरियाणा : पंजाब में गेहूं-धान की खरीद आढ़तिया (कमीशन एजेंट) के माध्यम से होती है. यही आढ़तिया किसानों को उनकी फसल का भुगतान भी करते हैं. केंद्र सरकार ने बाकी राज्यों की तरह किसानों को भुगतान सीधे बैंक खातों (डीबीटी) के जरिए की बात की थी, जिस पर लंबी जद्दोजहद के बाद 8 अप्रैल को पंजाब सरकार राजी हुई. लेकिन, अब आढ़तियों ने मोर्चा खोल दिया है. आढ़तियों ने नए सिस्टम से गेहूं खरीद से इनकार कर दिया है.


आढ़तिया एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष रविंदर सिंह चीमा ने बताया कि पंजाब में आढ़तिया गेहूं नहीं खरीदेंगे. हमने राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है. मुख्यमंत्री (कैप्टन अमरिंदर सिंह) के साथ बैठक में संघ ने अपनी बात रखी है. लेकिन हम किसान को परेशान नहीं करेंगे तो जो माल मंडी में आएगा उसे हम उतारेंगे, मंडी में खुला लंगर लगाएंगे. जब मंडियां भर जाएंगी 2-4 दिन में फिर हम ट्रैक्टर-ट्राली लेकर सड़कों पर उतरेंगे.


आढ़तिया एसोसिएशन पंजाब के मुताबिक पंजाब में गेहूं की खरीद के लिए करीब 32,000 कमीशन एजेंट (आढ़ती) रजिस्टर्ड हैं जबकि धान के लिए 28,000 अढ़तिया रजिस्टर्ड हैं. इसके अलावा जगहों पर धान के मौसम में कपास की खेती होती है, इसलिए गेहूं के आढ़तियों की संख्या ज्यादा है. यहां 1,850 बड़ी मंडियां हैं, जिनमें से 152 अनाज की मंडियां हैं.



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गौरतलब है कि एसोसिएशन पंजाब और फेडरेशन ऑफ पंजाब आढ़तिया एसोसिएशन, चीमा के मुताबिक दोनों संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव को नहीं माना है. चीमा ने बताया, पंजाब सरकार कह रही है कि वो दोबारा केंद्र से बात करेगी, देखते हैं क्या होता है. रही बात पैसे की तो हम लोग पहले से ही आरटीजीएस (बैंक ट्रांसफर) कर रहे हैं फिर नए नियम की क्या जरूरत है. 


केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के बीच लंबी जद्दोजहद के बाद पंजाब में गेहूं खरीद 10 अप्रैल से शुरू हो रही है. ये पहली बार होगा जब पंजाब में किसानों को गेहूं का पैसा आढ़तिया नहीं बल्कि भारत खाद्य निगम (एफसीआई) सीधे खातों में भेजेगा. एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का पैसा बैंक खातों में भेजने (डीबीटी) के लिए पंजाब सरकार और वक्त चाहती थी लेकिन केंद्र इसके लिए राजी नहीं हुआ.



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बताते चलें कि साल 2020 से पहले आढ़तिया किसी भी माध्यम से किसानों को पैसा दे सकते थे. लेकिन, पिछले गेहूं और साल धान के सीजन के बाद से आढ़तिया भी एमएसपी के पैसों को आरटीजीएस (ऑनलाइन ट्रांसफर) किया था, लेकिन केंद्र सरकार का कहना था कि आढ़तिया सिर्फ खरीद का काम करें, उसके बदले कमीशन लें. लेकिन, किसान का पैसा सीधे एफसीआई भेजेगी, जैसा की और राज्यों में होता है. 



उस वक्त पंजाब के आढ़तियों ने कहा था कि ये कमीशन एजेंट को मंडी से बाहर करने की साजिश हैं हालांकि केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने फरवरी 2021 में साफ किया था कि आढ़तिया अपना काम करते रहेंगे, खरीद उन्हीं के जरिए होगी, उन्हें कमीशन भी मिलेगा. लेकिन, पारदर्शिता और कालाबाजारी रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान जरूरी लागू किया जा रहा है.
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