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पीएम केअर फंड में शिक्षा संस्थान, आरबीआई, सरकारी बैंकों और एलआईसी स्टाफ की सैलरी काटकर पहुंचाई करोड़ों की रकम

Published On :    28 Sep 2020   By : MN Staff
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पीएम केअर फंड पर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा हैं. यह फंड एक बार फिर विवादों में आ गया हैं. सूचना के अधिकार में खुलासा हुआ हैं की सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से पैसा काट कर पीएम केअर फंड में करोड़ों की रकम पहुंचाई गई हैं.



नई दिल्ली : पीएम केअर फंड पर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा हैं. यह फंड एक बार फिर विवादों में आ गया हैं. सूचना के अधिकार में खुलासा हुआ हैं की सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से पैसा काट कर पीएम केअर फंड में करोड़ों की रकम पहुंचाई गई हैं. 


आरटीआई से सामने आया की पीएम केअर फंड  में न सिर्फ केंद्रीय शिक्षा संस्थानों से बल्कि कुछ पब्लिक सेक्टर बैंकों, सात अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों और भारतीय रिजर्व बैंक के स्टॉप की सैलरी से पैसा काटकर 204.75 करोड़ रुपए जमा किए गए. यह बात हमारे सहयोगी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की ओर से आरटीआई रिकॉर्ड्स की पड़ताल के दौरान सामने आई.


रिकॉर्ड्स के मुताबिक, एलआईसी, जीआईसी और नैशनल हाउसिंग बैंक के कर्मचारियों की सैलरी काटकर लगभग 144.5 करोड़ रुपए इस फंड में पहुंचाए गए. यह रकम इन्होंने अपने सीएसआर आवंटन और अन्य प्रावधानों के तहत काटी गई. ऐसे में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की आरटीआई का जवाब देने वाले 15 सरकारी बैंकों और संस्थानों द्वारा पीएम केअर फंड में कुल रकम 349.25 करोड़ रुपए हो जाती है.


आरटीआई का जवाब देने वाले सरकारी बैंकों और संस्थानों की लिस्ट में पीएम केअर फंड को सबसे अधिक  113.63 करोड़ रुपए अकेले एलआईसी की ओर दिये गए. हालांकि, यह रकम विभिन्न श्रेणियों के तहत दी गई, जिसमें 8.64 करोड़ रुपए स्टाफ की सैलरी से, 100 करोड़ रुपए ‘कॉरपोरेट कम्युनिकेशन’ के तहत और पांच करोड़ रुपए ‘गोल्डन जुब्ली फाउंडेशन’ के अंतर्गत दिए गए.


रिकॉर्ड्स के अनुसार एलआईसी ने 100 करोड़ की सहयोग राशि 31 मार्च को दी थी, जबकि पांच करोड़ का दान भी मार्च में ही किया गया, पर वह किस तारीख को किया गया? यह जवाब में स्पष्ट नहीं किया गया.
सात पब्लिक सेक्टर बैंकों द्वारा फंड को एसबीआई से सबसे ज्यादा रकम भेजी गई. आरटीआई के जवाब में बताया गया कि पहली बार 31 मार्च को 100 करोड़ रुपए भेजे गए थे. देश के सबसे बड़े बैंक ने यह भी बताया कि यह पूरी सहयोग राशि उसके कर्मचारियों की सैलरी में दी गई थी. वहीं, आरबीआई ने कहा कि 7.34 करोड़ रुपए उसके ‘कर्मचारियों की सैलरी काटकर दिए गए थे.



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इंडियन एक्सप्रेस ने इन बैंकों और संस्थानों से आरटीआई के जरिए पूछा, तो यह जानकारी सामने आया की कॅनरा बैंक ने अपने स्टॉफ की सैलरी काटकर 15.53 करोड़ की कुल रकम दी. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कर्मचारियों के एक दिन की प्रिवलेज लीव के एनकैशमेंट से 14.81 करोड़ रुपए भेजे. सेंट्रल बैंक ऑंफ इंडिया ने अपने कर्मियों के दो दिन की प्रिवलेज लीव एनकैशमेंट से 11.89 करोड़ रुपए पहुंचाए. बैंक ऑफ महराष्ट्र ने पांच करोड़ रुपए फंड में दिए. यह रकम कर्मचारियों के एक दिन की सैलरी और दो दिन के लीव एनकैशमेंट से थी.


एसआईबीडीआई बैंक ने 80 लाख रुपए फंड में दिए।. यह रुपए कर्मचारियों की सैलरी से वॉलंटियरी कंट्रीब्यूशन के तौर पर काटे गए. जीआईसी ने एक दिन की कर्मचारियों की सैलरी से 14.51 लाख रुपए दिए. आईआरडीएआई ने 16.08 लाख रुपए फंड में दिए. यह रकम ‘वॉलंटियरी कंट्रीब्यूशन’ काटी गई थी.


बता दें कि कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर 28 मार्च को पीएम केयर्स फंड का गठन किया गया था. 31 मार्च तक इस फंड में 3,076.62 करोड़ रुपए आ गए थे, जो कि पीएम केयर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक ‘वॉलंटियरी कंट्रीब्यूशंस’ थे. नाबार्ड ने भी अपने कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सैलरी से काटकर  9.04 करोड़ रुपए फंड को दिए.



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प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ इसका प्रबंधन करता है, जो पूर्व में विभिन्न जगहों से मिली सहयोग राशि का विवरण देने से इन्कार कर चुका है. पीएमओ कह चुका हैं की पीएम केअर फंड सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है. यह एक निजी फंड हैं जिसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जा सकती. खास बात यह हैं की पीएम मोदी ने राष्ट्रीय आपदा फंड होने के बावजूद पीएम केअर फंड बनाया जो शुरूवात से ही विवादों में घिर चूका हैं. यानी पारदर्शकता का ढ़ोल पीटने वाले इस फंड की जानकारी छूपा रहे हैं?

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