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सुदर्शन टीवी ने मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगालने के लिए बनाया ‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम!

Published On :    27 Sep 2020   By : MN Staff
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झूठी जानकारी सहीत गलत दावे किए पेश



नई दिल्ली : यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम को लेकर विवादों में घिरी सुदर्शन टीवी ने झूठी जानकारी के आधार पर यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम पेश किया. जिसका ऑल्ट न्यूज ने भंडाफोड किया हैं. ऑल्ट न्यूज़ ने पड़ताल करने पर सामने आया की सुदर्शन टीवी ने ग़लत दावों के आधार पर कार्यक्रम बनाया. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्यक्रम पर फ़िलहाल रोक लगाई हैं.


सुदर्शन टीवी ने इस कार्यक्रम में दावा किया था कि यूपीएससी परीक्षा में मुस्लिम उम्मीदवारों की तादाद बढ़ गई है और नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ कराई जा रही है. हालांकि ऑल्ट न्यूज़ ने कहा है कि यूपीएससी की वेबसाइट के आँकड़ों से स्पष्ट हैं की कुल पास उम्मीदवारों में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ़ 3 से 5 प्रतिशत हैं, जो उनकी आबादी से काफी कम है.


बता दें कि यूपीएससी 2015 में कुल 1078 लोगों का चयन हुआ था, जिसमें 36 मुसलमान थे. 2016 में यह संख्या 50 हो गयी, लेकिन उस साल अंतिम चयन वालों की संख्या बढ़ कर 1099 हो गयी थी. उसके बाद 2017 में कुल 990 लोगों का चयन हुआ था, जिसमें 52 मुसलमान थे. साल 2018 में यह संख्या 28 पर आ गयी. 


इस साल अंतिम चयन होने वालों की संख्या भी घट कर 759 हो गयी थी. यानी सिर्फ़ 2017 में ही यूपीएससी में मुस्लिमों की संख्या थोड़ी बढ़ी, लेकिन टीवी के शो में 2018 का आंकड़ा गायब कर दिया गया है. जिसमें पिछले साल के मुकाबले संख्या में गिरावट देखी जा सकती थी.


सुदर्शन टीवी का अन्य दावा है कि मुस्लिमों को उम्र में छूट दी गई जो गलत हैं. हिंदुओं के लिए अधिकतम उम्र 32 साल है जबकि मुसलमानों के लिए यह सीमा 35 साल रखी गई है. आयोग के 12 फ़रवरी, 2020 के जारी नोटिफ़िकेशन में सभी उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु सीमा 21 और उच्चतम आयु सीमा 1 अगस्त, 2020 तक 32 साल है. इसमें सभी कैटेगरी में छूट दी गयी है. एससी, एसटी की आयु सीमा में 5 साल और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 3 साल की छूट है.


मुस्लिम उम्मीदवारों में पिछड़े वर्ग के लोग ओबीसी को दी गयी ऊपरी आयु सीमा की रियायतें पाने के हक़दार होते हैं. लेकिन यह छूट केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि अन्य को भी मिलती है. यानी ओबीसी का लाभ अकेले मुस्लिम उठाते हैं, यह जो कहना हैं वह सरासर ग़लत है. 



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सुदर्शन न्यूज़ ने जानबूझ कर हिन्दुओं की तुलना जनरल कैटेगरी से की और मुसलमानों को ओबीसी की छूट का हवाला देते हुए ग़लत जानकारी पेश कर कहा की मुसलमानों को परीक्षा में फ़ायदा मिलता है. सुदर्शन टीवी का यह दावा भी ग़लत है कि हिंदुओं को 6 बार और मुसलमानों को 9 बार परीक्षा देने की छूट है. ओबीसी, एससी और एसटी के अलावा सभी उम्मीदवार 6 बार परीक्षा दे सकते हैं. सिर्फ विकलांगों को भी 9 मौके मिलते हैं.


सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम में एक अन्य दावा किया गया कि मुस्लिम उम्मीदवारों का कम मार्क्स पर ही चयन हो जाता है. उनके लिए कट ऑफ़ कम होता है. हालांकि कट ऑफ़ धर्म के आधार पर नहीं होता है. इसमें ओबीसी के तहत आने वाले मुस्लिम सहीत सभी को समान छूट मिलती है. सुदर्शन टीवी ने चालाकी से जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के मार्क्स की तुलना मुसलमानों के ओबीसी उम्मदवारो से की, जो निश्चित रूप से कम है.



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सुदर्शन टीवी ने मुसलमानों के ख़लिफ़ ज़हर उगलने के लिए दावा किया कि मनमोहन सरकार ने मुसलमानों के लिए 4 कोचिंग सेन्टर मुस्लिम बहुल विश्वविद्यालयों में खोले गए. जब की केंद्र ने 2009-10 के बीच 5 कोचिंग सेंटर खोले. सिविल सेवा और अन्य परीक्षाओं की तैयारी करवाने के लिए वंचित समुदायों को मुफ़्त  कोचिंग की सुविधा देने के लिए यह कदम उठाया गया था. 


राजस्थान के बांसवाड़ा के पुलिस एसपी कवेंद्र सिंह सागर 2014 में जामिया के कोचिंग सेंटर के स्टूडेंट थे. उन्होंने कहा है, यहां सिर्फ़ मुसलमान ही नहीं बल्कि सभी वंचित समूह एससी, एसटी और महिलाओं को यह सुविधा दी गयी है. लेकिन टीवी कार्यक्रम में जामिया मिलिया को निशाने पर लेकर कहा गया कि यह यूपीएससी जिहाद का केंद्र बन चुका है. सच यह है कि सामाजिक न्याय मंत्रालय एससी और ओबीसी छात्रों को बग़ैर धार्मिक भेदभाव के मुफ़्त कोचिंग देता है. यही नहीं कई राज्य सरकारें भी ग़रीब और वंचित समुदाय के छात्रों को मुफ़्त कोचिंग कराती हैं.



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ऑल्ट न्यूज़ का कहना है कि इंटरव्यू लेने वाले ने सुदर्शन न्यूज़ पर दिखाई गयी बात वाकई कही थी, लेकिन चैनल ने वीडियों को पूरा न दिखाते हुए वीडियो के कटे हुए हिस्से को दिखाया. हालांकि ओरिजिनल वीडियो में इंटरव्यूवर कह रहे हैं कि इंटरव्यू में बहुत कम मुस्लिम उम्मीदवार क्वालिफ़ाई कर पाते हैं.

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