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जनता का पैसा, प्राइवेट कंपनियों की कमाई, रेल यात्रियों की जेब पर डाका

Published On :    7 Jul 2020   By : MN Staff
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देश की जनता के साथ धोखा : सरकार ने दी निजी कंपनियों को किराया तय करने की आजादी



नई दिल्ली : ईवीएम के माध्यम से देश की सत्ता पर नाजायज तरीके से कब्जा करने वाली कांग्रेज और बीजेपी की सरकारें देश में नाजायज फैसले ले रही हैं. कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी दोनों ने बारी-बारी से भारतीय रेलवे का प्राइवेटाइजेशन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. इसकी शुरूआत सबसे पहले कांग्रेस ने की. लेकिन, बीजेपी सरकार इसे तेजी से आगे बढ़ा रही है. 


अभी हाल ही के दिनों में केन्द्र सरकार ने तकरीबन 100 रूट्स पर प्राइवेट कंपनियों को 151 प्राइवेट ट्रेन चलाने की मंजूरी दी थी, लेकिन सरकार अब उन्हीं प्राइवेट कंपनियों को किराया भी तय करने की आजादी दे रही है. इस तरह से पूंजीपति और सरकार आपस में समझौता कर जनता की जेब पर डाका डाल रहे हैं.


केन्द्र की संघी सरकार ने पहले भारतीय रेलवे का निजीकरण किया और अब निजी कंपनियों को ही किराया तय करने की आजादी दे दी. यह देश की जनता के साथ सरासर धोखेबाजी है. कुछ दिनों पहले सरकार ने रेलवे में निजी भागीदारी बढ़ाने का ऐलान किया था. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्राइवेट कंपनियां जो ट्रेन चलाएंगी, उसका किराया कौन तय करेगा? अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, रेलवे प्राइवेट कंपनियों को किराया तय करने का अधिकार दे सकती है. भारतीय रेलवे ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के जरिए 100 रूट्स पर 151 ट्रेन चलाने की मंजूरी दी है.



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लाइव मिंट के मुताबिक, इन कंपनियों की तरफ से चलाई जाने वाली ट्रेन की बुकिंग रेलवे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के जरिए ही होगी. नेशनल ट्रांसपोर्टर की तरफ से जारी प्रोजेक्ट इनफॉरमेशन मेमोरेंडम डाक्यूमेंट (पीआईएम) के मुताबिक, एक सिस्टम ऐसा तैयार किया जाएगा, जिसमें टिकट बुकिंग से होने वाली आमदनी एस्क्रो अकाउंट में रखा जाएगा. बताया जा रहा है कि पीआईएम का मकसद बोली लगाने वाली कंपनियों को पैसेंजर ट्रेन ऑपरेशंस के प्रस्ताव का विस्तृत आइडिया देना है. पीआईएम के मुताबिक, प्राइवेट कंपनियों की ट्रेन खुलने के 60 मिनट बाद तक कोई भी ट्रेन उस डेस्टिनेशन के लिए नहीं जाएगी. हालांकि, यह शर्त तब लागू नहीं होगी जब शुरू के तीन महीनों में इन ट्रेन की ऑक्युपेंसी 80 फीसदी से ज्यादा होगी.

 रेल की राष्ट्रीय सम्पत्ति को  बेचने की तैयारी
इतना ही नहीं, सरकार की मंशा जानकर चौंक जायेंगे कि सरकार रेलवे के विषय में और क्या सोच रही है. सरकार की मंशा रेलवे की पूरी सम्पत्ति ही बेचने की है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार देशभर के सभी रेलवे कॉलोनियों को बेचने की तैयारी कर रही है. पत्रिका डॉट कॉम के अनुसार, देशभर में 70 रेल मंडल हैं. इनमें रेल कर्मचारियों के लिए बनी कॉलोनी की भूमि को फिर से नर्व निर्माण के नाम पर बिक्री के आदेश दिए जा चुके हैं. इससे साबित होता है कि सरकार धीरे-धीरे रेल की राष्ट्रीय सम्पत्ति को बेंच रही है.



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मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाया जाएगा प्राइवेट ट्रेनें
हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रेनें प्राइवेट कंपनियों की चलेंगी, लेकिन रेलवे ट्रैक सरकार की होगी. यही नहीं, रेलवे ने यह भी कहा है कि इन ट्रेनों में से अधिकांश को मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाया जाएगा. एक और मजेदार बात है कि रेलवे में प्राइवेट कंपनियों का कंसेशन पीरियड 35 साल की संधि की गई है. यानी सरकार जनता के पैसे ट्रैक बनाएगी और कमाई प्राइवेट कंपनियां करेंगी.

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