×

केंद्र में तौर प्रतिनियुक्ति आईएएस और आईपीएस अधिकारी संयुक्त सचिव रैंक से नीचे के पदों परआने में करते हैं आनाकानी : रिपोर्ट

Published On :    3 Jul 2020   By : MN Staff
साझा करें:

कई विभागों के सैकड़ों पर खाली



नई दिल्ली : केंद्र सरकार में बतौर प्रतिनियुक्ति आईएएस और आईपीएस अधिकारी संयुक्त सचिव रैंक से नीचे के पदों पर नहीं आना चाहते हैं. अधिकांश राज्यों के आईएएस अफसर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर निदेशक या उप सचिव जैसे पदों पर काम करने के इच्छुक नहीं हैं. ऐसा ही हाल आईपीएस अधिकारियों का भी है. इनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिपोर्ट पर गौर करें तो विभिन्न सुरक्षा बलों या जांच एजेंसियों में एसपी और डीआईजी के पचास फीसदी से ज्यादा पद खाली पड़े रहते हैं. अगर डीआईजी के पदों की बात करें तो यह आंकड़ा 70 फीसदी के पार पहुंच जाता है. इनके इंतजार में कैडर अधिकारियों को भी परमोशन नहीं मिल पाता है. अब डीआईजी के अनेक पद जो आईपीएस के लिए खाली रहते हैं. वहीं आईजी या उससे ऊपर के पद ज्यादातर भरे रहते हैं.

पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखें, तो अधिकांश राज्यों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का जो कोटा तय किया गया है, वह खाली रह जाता है. खासतौर पर, उप सचिव और निदेशक के पद नहीं भर पाते हैं. पिछले साल केंद्र सरकार ने संयुक्त सचिव स्तर पर लेटरल एंट्री स्कीम के जरिए 9 नियुक्तियां की थीं. अब सरकार उसी दिशा में कदम आगे बढ़ा रही है. हो सकता है कि निदेशक और उप सचिव स्तर के पौने चार सौ से अधिक पदों को उक्त योजना के तहत भरा जाए. वाणिज्य मंत्रालय, रसायन, स्पेस तकनीक, ट्रांसपोर्ट, मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट, रेलवे, दूरसंचार, एचआरडी, हेल्थ, कृषि सेक्टर और कई दूसरे ऐसे विभाग हैं, जहां पर लेटरल एंट्री के जरिए पदों को भरा जा सकता है.

केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर क्यों नहीं आ रहे आईएएस?
केंद्र सरकार में करीब 1400 ऐसे पद हैं, जो सिविल सर्विस वाले अधिकारियों के लिए रखे गए हैं. इनमें ज्यादातर उप सचिव व निदेशक स्तर के पद हैं. हालांकि ये सभी पद आईएएस अधिकारियों के लिए नहीं हैं, इनमें दूसरी केंद्रीय सेवाएं जैसे आईएफएस व आईआरएस आदि सेवाओं के अफसर भी शामिल हैं. 600 ऐसे पद हैं, जहां केंद्रीय सचिवालय सेवा के तहत पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को तैनात किया जाता है. आईएएस प्रतिनियुक्ति के तहत उपसचिव और निदेशक पदों पर अधिकारियों का इंतजार करना पड़ता है. इसकी वजह है कि संबंधित अधिकारी अपने मूल कैडर में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर बन कर जाना ज्यादा अच्छा समझता है. वहां पर उसके पास बहुत से मामलों में स्वायत्तता होती है.



यह भी पढ़े : शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार के घंटे भर के अंदर बीजेपी में उठने लगे विरोध के सुर


आईपीएस भी एसपी और डीआईजी के पद पर केंद्र में नहीं आना चाहते
यही हाल आईपीएस का है. अगर उन्हें केंद्र में किसी सुरक्षा बल, जांच एजेंसी या किसी अन्य विभाग में एसपी और डीआईजी का पद दिया जाता है, तो वे ज्वाइन करने में आनाकानी करने लगते हैं. वजह, राज्य जैसी सुविधाएं केंद्र में नहीं मिलेंगी. जैसे बीपीआरएंडडी में डीआईजी आईपीएस के लिए 12 पद हैं, लेकिन उनमें से 10 खाली पड़े हैं. यह हालत तो तब है जब आईपीएस के इंतजार में 7 पद सीएपीएफ के कैडर अफसरों के लिए दे दिए गए हैं. जबकि, एसपी के 13 पदों में से 6 खाली है. बीएसएफ में डीआईजी के 26 पद हैं. जब आईपीएस नहीं मिले तो 15 पदों को कैडर अधिकारियों से भरने के लिए कहा गया है, इसके बावजूद 6 पद खाली रह गए.

इसी तरह से सीबीआई में डीआईजी के 35 स्वीकृत पद हैं, लेकिन 20 खाली पड़े हैं. साथ ही एसपी के 59 पद हैं, मगर अभी 29 पद खाली हैं. सीआईएसएफ में डीआईजी के बीस में से 16 पद खाली हैं. इसके अलावा सीआरपीएफ में डीआईजी के 37 पद स्वीकृत हैं. जब आईपीएस नहीं आए, तो 18 पद अस्थायी तौर पर कैडर अफसरों की ओर शिफ्ट कर दिए. इसके बाद भी आधे पद खाली हैं. आईबी में डीआईजी के 63 पद हैं, लेकिन 28 खाली हैं. एसपी के 83 पद हैं, जिनमें से 54 खाली पड़े हैं. केंद्र में आईपीएस के लिए डीआईजी के कुल 253 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी 134 खाली हैं. इसी तरह एसपी के 197 स्वीकृत पदों में से 97 खाली हैं. बता दें कि ये संख्या तो तब है, जब बहुत से पद आईपीएस के न आने के कारण कैडर अफसरों को दे दिए गए.

सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है आईपीएस बनाम कैडर अफसर विवाद

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) के कैडर अफसरों का विवाद सुप्रीम कोर्ट में है. हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सीएपीएफ के पक्ष में फैसला दे चुके हैं, लेकिन प्रमोशन को लेकर वह फैसला लागू नहीं किया गया है. कैडर अधिकारियों का कहना है कि जब तक नए सर्विस रूल नहीं बनते, तब तक इस फैसले का कोई औचित्य नहीं है. कोर्ट ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईजी के पचास फीसदी पदों को प्रतिनियुक्ति के जरिए भरने पर रोक लगा रखी है.
संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
केवल जुमला न साबित हो नई शिक्षा नीति, इसमें किए गए दावें प
बैंकों का विलय नहीं करेंगे, सीधा बैंक ही बेच देंगे...
न कोई नेता या मंत्री, न कोई अफसर देखने आया, न कोई मदद मिली
पांच दौर की बात के बाद भी चीनी सैनिक हटने को नहीं तैयार
नागरिकता कानून के नियम बनाने के लिए तीन महीने का दे और समय
आदिवासी महिला के साथ रेप के आरोप में सीआरपीएफ के 3 कर्मी न
भाजप नेता और साथियों ने मिलकर कई महीने तक किया बलात्कार, प
जुमला साबित हुआ कौशल आधारित रोजगार योजना
मेडिकल, ज़रूरी सेवाओं से वंचित लोग सीधे अदालत से संपर्क कर
दक्षिण भारत में फंसी केन्द्र सरकार की नई शिक्षा नीति
राम मंदिर निर्माण नहीं, आरएसएस मकसद दिल्ली की सत्ता पाना
लंबे लॉकडाउन से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बुरा हाल
नई शिक्षा नीति के तहत लड़कियों की स्कूल वापसी करा पाना मुश
जांच जारी होने के बावजूद चुनाव से पहले बलदेव सिंह को बनाय
देश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था
पीएम मोदी के क्षेत्र वाराणसी में बंद होने के कगार पर अंध व
विदेश मंत्री जयशंकर बोले- चीन का मुकाबला करने के लिये तैय
क्या राफेल में बेरोज़गारी और आर्थिक संकट खत्म करने की क्
बाबरी विध्वंस से पहले ही राव अयोध्या में निर्माण कराना च
कांग्रेस पार्टी की धर्मनिरपेक्षता का नकाब हटा
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper