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झारखंड चुनाव में 15 फीसदी मुस्लिमों की अनदेखी

Published On :    9 Dec 2019   By : MN Staff
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घट रहा उनका प्रतिनिधित्व



रॉंची : 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में मुसलमानों की आबादी 15 फ़ीसदी है, लेकिन विधानसभा में उनकी अनदेखी करने से राज्य में उनका दिनों दिन प्रतिनिधित्व घट रहा है. यही कारण रहा की 2014 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व दो सीटों पर सिमट कर रह गया.


संथाल परगना के देवघर, गोड्डा, जामताड़ा, साहेबगंज और पाकुड़ के अलावा लोहरदगा और गिरिडीह में मुसलमानों की आबादी सबसे ज़्यादा है. फिर भी मुसलमान उपेक्षित है. उन्हे पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही मिल रहा है. गोड्डा एकमात्र लोकसभा सीट है जहां से झारखंड बनने के बाद कोई मुसलमान सांसद बना.


बीजेपी ने झारखंड में आज तक किसी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया. मुख्यमंत्री रघुबर दास से जब ये सवाल पूछा गया कि प्रदेश में 15 फ़ीसदी मुसलमान हैं और आपकी पार्टी ने किसी भी मुसलमान लोकसभा में और न ही विधानसभा में टिकट नहीं दिया. इस पर उन्होंने कहा बिल्कुल नहीं. बीजेपी किसी को भी धर्म और जाति के आधार पर टिकट नहीं देती है. बीजेपी उस उम्मीदवार को टिकट देती है जिसमें जीतने की क्षमता होती है.


प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक दुबे का कहना है कि इस बार 31 सीटों पर ही कांग्रेस चुनाव लड़ रही है और इसमें भी कई सीटें आदिवासियों के लिए रिजर्व हैं ऐसे में तीन से ज्यादा गुंजाइश नहीं थी. उन्होंने कहा कि 2014 में उनकी पार्टी ने छह मुसलमान प्रत्याशी उतारे थे लेकिन दो ही जीत पाए थे. लेकिन वे इस बात से सहमत हूँ कि मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए.



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जेएमएम प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि उनकी पार्टी मुसलमानों को जितना टिकट देती है वो संतोषजनक है. उन्होंने कहा कि पार्टी को हर सेक्शन को देखना होता है. भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले बार पार्टी ने चार टिकट दिए लेकिन कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीत पाया.


रॉंची यूनिवर्सिटी में उर्दू भाषा के प्रोफ़ेसर रिज़वान अली झारखंड में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व को लेकर कहते हैं, झारखंड में नगर निगम के स्तर पर मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बढ़िया है. ऐसा इसलिए है कि नगर निगम का चुनाव पार्टियों के टिकट पर नहीं लड़ा जाता है. अगर पार्टियों के टिकट पर लड़ा जाता तो यहॉं भी वही स्थिति होती. प्रोफ़ेसर रिज़वान अली को लगता है कि मुसलमानों ने अपना नुक़सान धर्म को ज़्यादा प्रमुखता देकर भी किया है. वो कहते हैं, मुसलमान केंद्र में धर्म को रखते हैं. जब तक ये धर्म से अलग कर राजनीति नहीं करेंगे तब तक अधिकार नहीं मिलेगा.


इस बार झारखंड में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी 14 सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे हैं. झारखंड में एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष हुबान मलिक कहते हैं कि हर पार्टी ने झारखंड में मुसलमानों की उपेक्षा की है इसलिए ख़ालीपन को भरने के लिए दस्तक ज़रूरी थी. वो कहते हैं, मुसलमानों का वोट कोई बिरयानी नहीं है कि बॉंट कर खा लो. हम तो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. अगर हमलोग की वजह से बीजेपी को फ़ायदा मिलेा तो पहले किससे फ़ायदा मिलता था?


बाबूलाल मरांडी से पूछा कि अगर वो अपनी पुरानी पार्टी बीजेपी में होते तब भी छह मुसलमान प्रत्याशी उतारते? इस सवाल के जवाब में मरांडी ने मुस्कुराते हुए कहा, इसीलिए तो बीजेपी को छोड़ अलग पार्टी बनाई. ज़ाहिर सी बात है नहीं दे पाता.

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