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सरकार की जेएनयू प्रशासन को सलाह वापस ले छात्रों पर लगे केस

Published On :    9 Dec 2019   By : MN Staff
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सरकार ने सप्ताह के आखिर में समझौते का ये फॉर्मूला विश्वविद्यालय के समक्ष पेश किया था. मंत्रालय को अब जेएनयू प्रशासन के जवाब का इंतजार है.



नई दिल्ली : जएनयू प्रशासन को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सलाह दी है कि वो मौजूदा गतिरोध को खत्म करने के लिए छात्रों के खिलाफ पुलिस शिकायत वापस लें. साथ ही कहा की विश्‍वविद्यालय प्रशासन इस सिलसिले में एक अधिसूचना जारी करे. सरकार ने सप्ताह के आखिर में समझौते का ये फॉर्मूला विश्वविद्यालय के समक्ष पेश किया था. मंत्रालय अब जेएनयू प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहा हैं.


सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक छात्र संगठन को अधिसूचना से कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही जेएनयूएसयू की चुनाव समिति को यूनियन चुनाव के परिणाम घोषित करने की अनुमति दे दी है. इसका मतलब है कि कोर्ट को लिंदोह समिति की शिफारिशों का कोई उल्लंघन नहीं मिला था.



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बता दें कि पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन ब्लॉक में बर्बरता के संबंध में एक एफआईआर दर्ज की थी. वहीं उच्चस्तरीय समिति द्वारा 26 नवंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मामले में सरकार का यह पहला हस्तक्षेप है. हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी पर गतिरोध को समाप्त करने के उपाय सुझाने के लिए गठित की गई समिति ने सुझाव दिया था कि यूजीसी को जेएनयू को अपनी नकदी की कमी के लिए अतिरिक्त धनराशि जारी करनी चाहिए. इसके अलावा यूनिवर्सिटी को हितधारकों से बातचीत के बाद ही फीस बढ़ानी चाहिए.


उल्लेखनीय है कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह सर्विस चार्ज और यूटिलिटी चार्ज है, जो अब तक छात्रावास शुल्क में शामिल नहीं थे. शुल्क के नए बदलाव में सिंगल कमरे का किराया बीस रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 600 रुपए प्रति माह कर दिया गया है. इसी तरह डलब शेयरिंग रूम का किराया 10 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया. चूंकि फीस वृद्धि को आधिकारिक तौर पर पारित कर दिया गया था. इसके विरोध में छात्रों का गुस्सा फुटा था.

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