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रेप की राजधानी बना उत्तर प्रदेश का उन्नाव

Published On :    8 Dec 2019   By : MN Staff
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11 महीनों में 86 रेप, 185 यौन उत्पीड़न : रिपोर्ट



उन्नाव : एक ओर हैदराबाद का तेलंगाना तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश का उन्नाव जिला, बढ़ते अपराधों की वजह से देशभर में सुर्खियों में बना हुआ है. उन्नाव के आंकड़ों पर यदि गौर करें तो पता चलेगा कि बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में उन्नाव उत्तर प्रदेश की राजधानी बन गया है. एक रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2019 में जनवरी से नवंबर के बीच रेप के 86 मामले दर्ज किए गए हैं. हालांकि, बहुत से ऐसे मामले हैं जो दर्ज ही नहीं हुए है.


रिपोर्ट के अनुसार, उन्नाव में इस वर्ष (2019) जनवरी से नवंबर के बीच रेप के 86 मामले दर्ज किए गए हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो इसे उत्तर प्रदेश की ‘रेप की राजधानी’ कहना गलत नहीं होगा. उन्नाव में तकरीबन 31 लाख लोग रहते हैं. यह जिला लखनऊ से 63 किलोमीटर और कानपुर से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यदि रिपोर्ट्स की मानें तो जनवरी से नवंबर के बीच महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के भी 185 मामले उन्नाव से सामने आए हैं.


पूर्व में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगा रेप का आरोप, पीड़िता के ऐक्सिडेंट ने उन्नाव का नाम देश-विदेश की जुबान पर ला दिया. अब उन्नाव में एक और गैंगरेप के बाद आरोपियों द्वारा पीड़िता को जिंदा जलाए जाने के केस ने फिर देशभर की मीडिया में इसे चर्चा का विषय बना दिया है. बता दें कि पीड़िता की शुक्रवार को सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई. इन सबके बीच कई ऐसे मामले ऐसे भी है जो मीडिया के कैमरो में धुंधले ही रहे.


रिपोर्ट के मुताबिक, उन्नाव में रेप और छेड़छाड़ के आरोपों में असोहा, अजगैन, माखी और बांगरमऊ में केस दर्ज किए गए है. कुछ मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार तो कर लिया गया. लेकिन, बेल पर रिहा कर दिया गया या तो वे अभी गिरफ्त से दूर हैं. अजगैन निवासियों का कहना है कि उन्नाव में पुलिस का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो चुका है. राजनीति के आकाओं की मर्जी के बिना वह एक इंच भी कदम आगे नहीं बढ़ाते हैं, यह बात अपराधियों का मनोबल बढ़ाती है.



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यही नहीं उत्तर प्रदेश के उन्नाव से कई शीर्ष राजनेता ताल्लुक रखते हैं. इनमें उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर हृदयनारायण दीक्षित, यूपी के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक और बीजेपी सांसद साक्षी महाराज शामिल हैं. एक स्थानीय वकील ने कहा, यहां अपराध को राजनीति से बढ़ावा मिलता है. नेता अपराध को राजनीतिक दुश्मनी के लिए इस्तेमाल करते हैं और पुलिस उनकी कठपुतलियों की तरह काम करती है. एक भी ऐसा मामला नहीं है जिसमें पुलिस ने सख्त रवैया अपनाया हो.

महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश है भारत

भारत की महिलाओं के लिए भारत ही सबसे ज्यादा खतरनाक देश बन गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ हर रोज 100 बलात्कार होते हैं तो वहीं दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, हर 15 मिनट में एक बलात्कार, हर 22 मिनट में एक सामुहिक बलात्कार तो हर 35 मिनट में एक बच्ची को हवस का शिकार बनाया जाता है. थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की एक स्टडी के मुताबिक, भारत को महिलाओं के लिए सबसे असुक्षित देशों की सूची में पहले स्थान पर रखा गया है. सर्वे महिलाओं के मुद्दों से जुड़े 550 विशेषज्ञों द्वारा किया गया है.


वास्तव में भारत के लिए ये रिपोर्ट एक बहुत बड़ा झटका है. क्योंकि, सात साल पहले इसी रिपोर्ट में भारत को सातवें पायदान पर रखा गया था. 2011 में हुए इस सर्वे के मुताबिक अफगानिस्तान, कॉन्गो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश माने गए थे. लेकिन, इस साल महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों के मामले में भारत दूसरे देशों से आगे निकल गया. देश में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा आए दिन उठता रहता है पर फिर भी जमीनी तौर पर महिलाएं भारत में ही सबसे ज्यादा खतरे में हैं.



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सर्वे में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा और सेक्स धंधों में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है. रॉयटर्स के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस सर्वे के परिणामों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2007 से 2016 के बीच महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध में 83 फीसदी का इजाफा हुआ है.


बता दें कि महलाओं के खिलाफ इस तरह के मामले उन सकारों के पोल खोल रहे हैं जो कभी ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ का नारा देते नहीं थकते हैं तो कभी एंटीरोमिया स्वायड बनाकर मनचलों को पकड़े का दम्भ भरते हैं. महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने सरकारों की कलई नेशनल रिर्काड ब्यरो (एनसीआरबी) के उन आंकड़ों से खुलती है जो ये बताते हैं कि बीते तीन सालों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कोई कमी नहीं आई है. 


हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ वर्ष 2017 में 3,59,849 मामले दर्ज हुए थे. वहीं 2016 में यही आंकड़ा 3.38 लाख थे. जबकि, वर्ष 2015 में यही आंकड़ा 3.29 था. यही नहीं वर्ष 2017 में महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और सामुहिक बलात्कार के बाद उनकी हत्या करने के 223 मामले दर्ज हुए थे.


यदि राज्यवार आंकड़ों पर गौर करें तो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के केवल उन्नाव जिले में महज 11 महीनों में ही 86 रेप और 185 यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज हैं. जिनमें केवल गैंगरेप के 64 मामले दर्ज हैं. इसी तरह से असम में 27, महाराष्ट्र में 26 और मध्य प्रदेश में 21 केवल गैंगरेप के मामले दर्ज हैं. 


अगर, महिलाओं के अपहरण की बात करें तो देश भर में 6,63,33 मामले दर्ज हैं. महिला अपहरण के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. यूपी में 14,993 अपहरण, महाराष्ट्र में 6,248, बिहार में 6,182 और झारखंड में 1,033 अपहरण के वारदात हुए हैं. इन आंकड़ों से साबित होता है कि भारत ही भारत की महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश बन गया है.

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