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इथोपिया के प्रधानमंत्री को इस बार शांति का नोबेल पुरस्कार

Published On :    12 Oct 2019   By : MN Staff
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20 साल पूरानी तकरार सुलझाई नोबेल प्राइज कमेटी के अध्यक्ष बेरिट रीस एंड्रसन के मुताबिक, अहमद ने जब शांति के मकसद से हाथ आगे बढ़ाया था, तब राष्ट्रपति इसाइयस अफवर्की ने उसे अच्छे से समझा और दोनों देशों के बीच शांति बहाली के लिए आगे आए.



नई दिल्ली :  इथोपिया के प्रधानमंत्री अबीय अहमद अली को २०१९ का शांति का नोबाल पुरस्कार मिला है. नॉरवेजियन नोबेल समिति ने अली को यह पुरस्कार इसलिए देने का फैसला लिया, क्योंकि वह शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को लेकर लगातार प्रयास करते रहे. यही वजह है कि 43 वर्षीय अली को इथोपिया के नेल्सन मंडेला के नाम से भी लोग पुकारते हैं.



खासकर पड़ोसी मुल्क इरीट्रिया के साथ सीमा विवाद सुलझाने में उनकी ओर पहल की गई थी. इथोपिया और इरीट्रिया के बीच यह तकरार लगभग 20 साल तक चली थी, जिसमें खत्म कराने में अली का बड़ा योगदान है.



समिति ने इस पुरस्कार जारी करने के साथ ही कहा कि उसे लगता है कि अब अली के इन प्रयासों को पहचान और बढ़ावा मिलना चाहिए. यह पुरस्कार उन सभी को पहचान दिलाने के लिए है, जो लगातार इथोपिया और पूर्वी व उत्तरी पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्रों में शांति के साथ सुलह की दिशा में काम कर रहे हैं.



नोबेल प्राइज कमेटी के अध्यक्ष बेरिट रीस एंड्रसन के मुताबिक, अहमद ने जब शांति के मकसद से हाथ आगे बढ़ाया था, तब राष्ट्रपति इसाइयस अफवर्की ने उसे अच्छे से समझा और दोनों देशों के बीच शांति बहाली के लिए आगे आए.



यह भी पढ़िए  :   बाबरी मस्जिद की जमीन हिंदुओं को दान में दे



बकौल एंड्रसन, प्रधानमंत्री रहने के दौरान शुरुआती 100 दिनों में अली ने देश में लगी ‘इमरजेंसी’ हटाई, हजारों सैकड़ों राजनीतिक बंदियों को माफ किया, मीडिया पर लगी सेंसरशिप वापस ली, भ्रष्टाचार में लिप पाए गए सैन्य अधिकारियों और नेताओं को व्यवस्था से बाहर किया और इथोपियाई राजनीतिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं के प्रभाव को बढ़ाने के लिए काम किया.



शांति के लिए इस बार के नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद इथोपियाई पीएम के दफ्तर का बयान आया, हमें एक राष्ट्र के तौर पर गर्व है कि हमने यह सम्मानजनक प्राइज जीता. 



अली ने इथोपिया और इरीट्रिया के संबंधों में मिठास घोलने के अलावा केन्या और सोमालिया के रिश्ते सुधारने में भी मदद की, जो कि सैन्य विवाद में उलझे थे. अली ही वह व्यक्ति थे, जो सूडान और दक्षिणी सूडान के नेताओं को बातचीत और शांति बहाली के लिए राजी कर पाए. 

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