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सोशल मीडिया पर शिकंजा कसने की तैयारी, आईटी नियमों होने वाला है बड़ा बदलाव

Published On :    24 Jun 2022   By : MN Staff
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अगर किसी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया है, तो उस पोस्ट के लिए कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. अगर किसी को किसी भी सामग्री पर आपत्ति है तो उसके सभी संदेह 7 दिनों के भीतर दूर हो जाने चाहिए.



नई दिल्ली : भारत सरकार की और 2021 में नए नियमों के आने के बावजूद बड़ी सोशल मीडिया इंटरमीडियरी उसे ठीक से लागू नहीं कर रहीं थी. इसलिए अब केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर शिकंजा कसने के लिए आईटी नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है. जल्द ही गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे लोगों को बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.



इस संबंध में सरकार ने गुरुवार को एक बड़ी मीटिंग भी रखी है, जिसमें सोशल मीडिया के नियमों को लेकर चर्चा होगी. दरअसल, सरकार सोशल मीडिया कंपनियों को जिम्मेदार बनाने के लिए भारतीय कानूनों को लागू करने की कवायद कर रही है. अगर कोई सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करता है तो उसकी जवाबदेही कंपनी की होगी.



सरकार के नियम के अनुसार, अगर किसी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया है, तो उस पोस्ट के लिए कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. अगर किसी को किसी भी सामग्री पर आपत्ति है तो उसके सभी संदेह 7 दिनों के भीतर दूर हो जाने चाहिए. इसके साथ ही 72 घंटे के अंदर पोस्ट को सभी प्लेटफार्म से हटाना होगा. इसके अलावा जिसने भी पोस्ट किया है उसे भी प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाए. इसके साथ ही इससे जुड़ा कोई सवाल है तो उसे एक महीने के अंदर जमा करना होगा. इसके अलावा सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने होंगे, अधिकारियों को नियुक्त करना होगा और सभी सरकारी नियमों का पालन करें.


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नये नियमों के तहत सरकार सोशल मीडिया कंपनियों से गैर कानूनी कंटेंट के सोर्स के बारे में भी जानकारी मांग सकती है, ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके. वर्तमान में वॉट्सऐप जैसी कंपनियां इस तरह की जानकारी देने से इनकार करती रही हैं.  इन कंपनियों के अनुसार उनके प्लेटफॉर्म पर कम्युनिकेशन एंड-टू-एड एनक्रिप्टेड हैं. इसलिए वे गैर कानूनी कंटेंट के सोर्स के बारे में नहीं पता लगा सकती हैं.



नए नियमों पर इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इसे इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सरकार के नियंत्रण की कोशिश बताते हुए इसका विरोध किया है. संगठन ने अन्य यूजर्स से भी इसके खिलाफ अपनी टिप्पणियां मसौदा प्रस्ताव पर देने का आग्रह किया है.



सोशल मीडिया के इस बिल को इस मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी की जा रही है. सरकार का कहना है कि इस बिल की जरूरत इस वजह से भी है क्योंकि कई बार देखा गया है कि सोशल प्लेटफॉर्म से फेक न्यूज फैलाया गया है. इसलिए इस पर लगाम लगाने के लिए बिल पेश करने की तैयारी की जा रही है.



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