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एनसीईआरटी की क़िताबों में आए एमएफ हुसैन और मुग़लों का चैप्टर को आरएसएस के संगठन का विरोध

Published On :    14 Jan 2021   By : MN Staff
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प्रसिद्ध चित्रकार और भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सन्मान से नवाजे गए एमएफ हुसैन और मुग़लों का चैप्टर एनसीईआरटी की क़िताबों में आने पर आरएसएस से जुडे संगठन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएसयूएन) ने इसे विरोध जताया हैं.



नई दिल्ली : प्रसिद्ध चित्रकार और भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सन्मान से नवाजे गए एमएफ हुसैन और मुग़लों का चैप्टर एनसीईआरटी की क़िताबों में आने पर आरएसएस से जुडे संगठन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएसयूएन) ने इसे विरोध जताया हैं. 


मंगलवार को एक संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एनसीईआरटी के स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में विकृतियों को चिह्नित किया. इसमें कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक में दिवंगत कलाकार एमएफ हुसैन का एक अध्याय और कक्षा 12 इतिहास की पाठ्यपुस्तक में मुगल शासकों का पूजा स्थलों के निर्माण और रखरखाव के लिए अनुदान देने का संदर्भ दिया गया था.


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा शाखा, विद्या भारती के पूर्व प्रमुख दीनानाथ बत्रा की अध्यक्षता वाले न्यास को मंगलवार को शिक्षा, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में आमंत्रित किया गया था. इसमें पाठ्यपुस्तक में सुधार और गैर-ऐतिहासिक तथ्यों के संदर्भों को हटाने और पाठ्यपुस्तकों से हमारे राष्ट्रीय नायकों के बारे में विकृतियों पर सुझाव मांगे गए.


राज्यसभा सदस्य विनय सहस्रबुद्धे पैनल के प्रमुख हैं. बैठक में स्कूल शिक्षा, एनसीईआरटी और सीबीएसई  विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत, एनसीईआरटी के शंकर शरण, एसएसयूएन और आरएसएस से जुड़े भारतीय शिक्षा मंडल (बीएसएम) ने मंगलवार को समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा. 



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समिति की अगले सप्ताह फिर से बैठक होने की संभावना है. एसएसयूएन और बीएसएम को भेजे गए निमंत्रण के मुताबिक समिति ने सोशल मीडिया पर इस विषय पर प्रतिक्रिया मांगी थी. साथ ही इसके माध्यम से कुछ संगठनों को व्यक्तिगत रूप से सुनने का अनुरोध किया गया था.


पैनल में अपनी प्रस्तुति में एसएसयूएन ने कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक अंट्रल में चित्रकार एमएफ हुसैन के एक अध्याय पर आपत्ति जताई. न्यास ने महसूस किया कि छात्रों के लिए ऐसे व्यक्ति के जीवन का अध्ययन करना अनुचित है, जिस पर अश्लीलता को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का आरोप लगा हो. 



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एसएसयूएन ने मुग़ल शासकों द्वारा अपने गैर-मुस्लिम विषयों के प्रति एक लचीली नीति अपनाने और 12 वीं कक्षा के इतिहास की पाठ्यपुस्तक में भारतीय इतिहास में विषय-वस्तु शीर्षक से युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त मंदिरों की मरम्मत के लिए अनुदान देने वाले अध्याय का यह कहकर विरोध किया कि ये वाक्य विदेशी आक्रमणकारियों के महिमामंडन करते हैं.



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