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मेन स्ट्रीम मीडिया सरकार के साथ खड़ी है : कर्मचारी

Published On :    6 Jul 2020   By : MN Staff
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कॉमर्शियल माइनिंग के विरोध में कोल इंडिया के चार लाख मजदूरों का देशव्यापी हड़ताल



रायपुर : मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ कोल इंडिया के लगभग चार लाख कर्मचारियों और मजदूरों ने तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल की. कोयला उद्योग में इस हड़ताल का प्रभाव साफ दिखा, सभी मजदूर संगठनों में कमर्शियल माइनिंग सहित 5 सूत्री मांगों को लेकर सर्वसम्मति बरकार है. इन 5 सूत्रीय मांगों में कामर्शियल माइनिंग के निर्णय को वापिस लेना, कोल इंडिया के प्राइवेटाइजेशन को रोकना और ठेका श्रमिकों को उचित दर से भुगतान करने जैसी मांग शामिल है. 


हालांकि, यह पहला मौका है जब भारत में कोयला खदानों को कॉमर्शियल माइनिंग (वाणिज्यिक खनन) के लिए खोला जा रहा है. जिन क्षेत्रों में कोयला ब्लॉक के नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है, वहां के स्थानीय लोग और कोल इंडिया के कर्मचारी, मजदूर और श्रमिक संगठन केंद्रीय मंत्री की बातों से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. कोयला संबंधी विषयों पर काम करने वाले कई विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह केवल कोयले का निर्यात नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, विस्थापन और प्रदूषण का आयात है.

कोरबा के दीपका खदान के कर्मचारी सृष्टिधर ने कहा लॉकडाउन में लगभग सभी उद्योग जब बन्द पड़े थे, तब भी कोल इंडिया ने अपने कर्मचारियों से काम लेना बन्द नहीं किया था. लगातार कोयला खदानों में काम चलता रहा ताकि गांव शहर रोशन रहे और पर्याप्त बिजली लोगों तक पहुंचे और कोरोना से लड़ने में कम से कम बिजली आपूर्ति की समस्या ना आये. उन्हांने मेनस्ट्रीम मीडिया पर अरोप भी लगाया कि मेन स्ट्रीम मीडिया ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को दिखाना जरूरी नहीं समझा, बलिक मेनस्ट्रीम मीडिया ने इस हड़ताल की कवरेज ना करके अपना पक्ष ही दिखाया है. अगर वो इस हड़ताल और हमारी मांगों को अन्य लोगों तक पहुँचाने में हम कोल वर्कर्स की मदद नहीं करते हैं तो हम तो यही मानेंगे कि वो सरकार के साथ खड़े हैं.



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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर कोयला श्रमिकों की जो 3 दिवसीय हड़ताल चल रही है, उससे कोयला उत्पादन में खासा फर्क पड़ा है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 3 दिन के उत्पादन रुकने से 7 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसका सीधा प्रभाव ज्यादतर ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ेगा. 



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बावजूद इसके जब मेनस्ट्रीम मीडिया में हड़ताल का जिक्र तक नहीं है. मीडिया के इस रवैये पर हिन्द मजदूर सभा के दीपका क्षेत्र के महामंत्री तरुण राहा ने कहा, निजीकरण के द्वारा सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है और कहीं ना कहीं इन्हीं पूंजीपतियों का पैसा तमाम मीडिया कंपनियों में लगा है. इसलिए शायद मीडिया हमें कवरेज नहीं दे रही है. कोयला मजदूरों के तीन दिवसीय हड़ताल का आज तीसरा और आखिरी दिन है. सरकार ने वार्ता के जरिये श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों को मनाने की कोशिश भी की है. लेकिन सभी संगठन अपनी मांगों पर अडिग खड़े हैं.


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