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उद्योगपतियों पर मेहरबान मोदी सरकार, कंपनियों को दी कई टैक्स में छूट

Published On :    20 Sep 2019   By : MN Staff
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मोदी सरकार बीते पाँच सालों से कारपोरेट घरानों पर मेहरबान होते आ रही है. सरकारी खजाने को हर साल लगेगी 1.45 लाख करोड़ की चपत



नई दिल्ली: मोदी सरकार बीते पाँच सालों से कारपोरेट घरानों पर मेहरबान होते आ रही है. नतीजी यह हुआ कि जो पहले 35 प्रतिशत टैक्स था वह 25 प्रतिशत पर आ गया और अब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उद्योगपतियों को टैक्स मुक्त करने की तैयारी शुरू हो चुकी है. जबकि, मोदी सरकार के इस फैसले से सरकार को हर साल 1.45 लाख करोड़ की भारी चपत लग सकती है.


गौरतलब है कि मंदी से उबरने के लिए मोदी सरकार-2 ने अब तक का सबसे बड़ा ऐलान किया है. सरकार ने कंपनियों को कई तरह के टैक्स में छूट दी है. ये छूट इतनी बड़ी है कि सरकार पर सालाना 1.45 लाख करोड़ बोझ बढ़ जायेगा.


सूत्रों के मुताबिक 20 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि कोर्पोरेट टैक्स में ये छूट एक अध्यादेश से प्रभावी होगी. बताया जा रहा है कि सरकार के इस बड़े ऐलान से शेयर बाजार तुरंत चढ़ गया. 


यह भी बताया जा रहा है कि एक बार में ही सेंसेक्स 1600 अंक ऊपर चढ़ गया. इनकम टैक्स एक्ट में 2019-20 से प्रभावी एक प्रावधान जोड़ा गया है. जिससे, 1 अक्टूबर, 2019 या इसके बाद बनी कोई भी नई घरेलू कंपनी मैन्युफैक्चरिंग में ताजा निवेश करती है तो उस पर 15 फीसदी का इनकम टैक्स लगेगा.


इनकम टैक्स एक्ट में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है. जिसके, मुताबिक किसी घरेलू कंपनी को कुछ शर्तों के साथ 22 फीसदी की दर पर इनकम टैक्स देना होगा. ऐसा करने के लिए ये कंपनियाँ किसी इंसेंटिव या छूट का फायदा नहीं उठा पाएंगी. सभी सरचार्ज और सेस मिलाकर इन कंपनियों के लिए प्रभावी टैक्स दर 25.17 फीसदी होगी.


कैपिटल मार्केट में फंड के फ्लो को स्थायी बनाने के लिए इक्विटी की बिक्री पर लगने वाले कैपिगेट गेन्स टैक्स पर सरचार्ज को हटा लिया गया है. ये सरचार्ज इस साल बजट में लाया गया था. 5 जुलाई 2019 से पहले जो लिस्टेड कंपनियाँ बायबैक को सार्वजनिक कर चुकी है, उन्हें राहत मिलेगी. ऐसी कंपनियों को शेयरों के बायबैक पर कोई टैक्स नहीं देना होगा.


यह भी पढ़े : हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा



बता दें कि मोदी सरकार जीएसटी लागू करने से पहले यही रवैया अपनाई थी. जीएसटी लागू करने से पहले सरकार ने कहा था कि छोटे-छोटे कई तरह के टैक्सों को खत्म करके केवल एक टैक्स होगा. जो पहले कई तरह के टैक्स देते थे जीएसटी लागू होने के बाद सब जोड़कर एक टैक्स के रूप में लिया जायेगा. लेकिन, जैसे ही जीएसटी लागू हुआ सरकार ने अब 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से मुक्ति कर दिया.


बताते चलें कि तत्काल केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जीएसटी के लिए कारोबार की छूट सीमा 20 लाख रुपए वार्षिक तय की गई है. इसका सीधा मतलब है कि जिन कारोबारियों की सालाना आय 20 लाख रुपए तक है, उन्हें जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा. इस तरह से मोदी सरकार कंपनियों के ऊपर लगे टैक्स को धीरे-धीरे खत्म करती जा रही है. 



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