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पीएफआई पर बैन से कर्नाटक बीजेपी में दरार, नेता बोले- एसडीपीआई के लिए लेकर आया बड़ा मौका

Published On :    2 Oct 2022   By : MN Staff
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कर्नाटक भाजपा एक नेता ने कहा, ‘चाहे वह हिजाब हो, धर्मांतरण विरोधी विधेयक या पीएफआई पर प्रतिबंध को लेकर पार्टी द्वारा लिया गया स्टैंड ३ ये मुद्दे ज्यादातर तटीय कर्नाटक हिस्सा हो सकते हैं.



नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को पांच साल के लिए बैन किए जाने के बाद कर्नाटक भाजपा में दरार आ गई है. कर्नाटक में भाजपा के भीतर नेताओं का एक समूह पीएफआई पर प्रतिबंध को चुनावी मुद्दा बनाकर आगामी विधानसभा चुनावों में फायदा उठाने की पार्टी की रणनीति पर सवाल उठा रहा है. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और विधायक ने कहा कि पार्टी के भीतर एक चिंता है कि पार्टी द्वारा उठाए गए मुद्दों का प्रभाव कर्नाटक में ही काफी जगहों पर अपर्याप्त है. वहीं, पीएफआई पर बैन लगना कर्नाटक में एसडीपीआई के लिए बड़ा मौका लेकर आया है.


एचटी के अनुसार, नाम न लेने की शर्त पर कर्नाटक भाजपा एक नेता ने कहा, ‘चाहे वह हिजाब हो, धर्मांतरण विरोधी विधेयक या पीएफआई पर प्रतिबंध को लेकर पार्टी द्वारा लिया गया स्टैंड ३ ये मुद्दे ज्यादातर तटीय कर्नाटक हिस्सा हो सकते हैं. जबकि दक्षिण कर्नाटक के जिलों में हमारे पास अभी भी जीत दर्ज करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है. पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार के फैसले ने अटकलों को हवा दी है कि एसडीपीआई आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है.


राजनीतिक विश्लेषक प्रो. मुजफ्फर असदी ने कहा कि पीएफआई पर प्रतिबंध अल्पसंख्यक समुदाय को एकजुट और एसडीपीआई को मजबूत कर सकता है. मुझे लगता है कि अब वह 2023 के विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की सोच रही होगी. अल्पसंख्यक समुदाय यह मान सकता है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और वे फिर से संगठित हो सकते हैं. इससे कांग्रेस की सबसे बड़ी हार होगी.


हालांकि, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इससे इनकार कर दिया. उसके अनुसार, पीएफआई पर प्रतिबंध से लोगों को यह एहसास होगा कि भाजपा को सत्ता से हटाना सबसे महत्वपूर्ण है. जो समुदाय पहले से ही सरकार की सांप्रदायिक नीतियों से निराश है वह आगामी चुनावों में तटीय क्षेत्रों में हमारा समर्थन करेगा.


गौरतलब है कि दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र में एसडीपीआई ने कोई भी विधानसभा क्षेत्र नहीं जीता, लेकिन उनके वोट शेयर में वृद्धि हुई. 2013 के विधानसभा चुनाव में, एसडीपीआई को 3.2 फीसदी का वोट मिला और 2018 के चुनाव तक वोट शेयर बढ़कर 10.5 फीसदी हो गया. एसडीपीआई ने दिसंबर 2021 में कर्नाटक के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भी छह सीटें जीती थीं. इस बीच, एसडीपीआई राज्य समिति के सदस्य रियाज कदंबू ने कहा कि वे 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कम से कम 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

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