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खतरे की घंटी : इतिहास में पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 81 के पार, बढ़ेगी महंगाई

Published On :    24 Sep 2022   By : MN Staff
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अमेरिकी डॉलर में मजबूती के बीच निवेशक जोखिम उठाने से बच रहे हैं जिसके चलते शुक्रवार को शुरुआत में रुपया 44 पैसे की गिरावट के साथ पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 81 के स्तर को पार कर गया.



मुंबई : अमेरिकी डॉलर में मजबूती के बीच निवेशक जोखिम उठाने से बच रहे हैं जिसके चलते शुक्रवार को शुरुआत में रुपया 44 पैसे की गिरावट के साथ पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 81 के स्तर को पार कर गया. रूपया गिरने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कमी आ रही है. अब यह गिरकर 16 सितंबर को ये 545.652 बिलियन डॉलर तक गिर गया है. इससे महंगाई बढ़न की अटकले लगाई जा रही है.


विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड के दरों में बढ़ोतरी करने और यूक्रेन में तनाव बढ़ने की वजह से निवेशक जोखिम उठाने से बच रहे हैं. इसके अलावा विदेशी बाजारों में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती, घरेलू शेयर बाजार में गिरावट भी रुपये को प्रभावित कर रहे हैं. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 81.08 पर खुला, फिर और फिसलकर 81.23 पर आ गया जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 44 पैसे की गिरावट दर्शाता है.  बृहस्पतिवार को रुपया 83 पैसे टूटकर 80.79 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था.


भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में 5.219 अरब अमेरिकी डॉलर की घटोतरी हुई है. 2 अक्टूबर, 2020 के बाद से ये इसका सबसे निचला स्तर है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रुपये की कीमत ने रिजर्व बैंक की टेंशन थोड़ी बढ़ा दी है. लिहाजा आरबीआई रुपये की कीमत को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रहा है.


डॉलर में तेजी की वजह से भारतीय रुपया पर लगातार दबाव बना हुआ है. अगस्त में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. 2 सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 560 अरब डॉलर से गिरकर 553.105 अरब डॉलर पर आ गया था. इसमें 7.941 अरब डॉलर की गिरावट देखने को मिली थी. इस समय मुद्रा भंडार 2 साल के निचले स्तर पर आ गया था. 26 अगस्त 2022 को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 561.046 अरब डॉलर था.


गौरतलब है कि रुपया कमजोर होने से विदेशी मुद्रा भंडार कमजोर होता है. वहीं अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत डॉलर में तय होती है, जिसके कारण देश में तेल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं. देश को आयात के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं जिसके कारण आयात किया हुआ समान और ज्यादा महंगा हो जाता है. इसके कारण देश में महंगाई बढ़ती है. वहीं इससे विदेश में पढ़ाई-लिखाई भी महंगी होगी.

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