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हिमाचल में और सख्त हुआ धर्मांतरण कानून, धर्मांतरण के बाद एससी/एसटी को नहीं मिलेगा आरक्षण, जाना होगा जेल

Published On :    14 Aug 2022   By : MN Staff
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हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने धर्म परिवर्तन कानून को और सख्त कर दिया गया है. अब अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित श्रेणी के व्यक्ति ने अगर धर्म परिवर्तन किया तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा और सामूहिक धर्मांतरण कराने पर जेल जाना होगा.



नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने धर्म परिवर्तन कानून को और सख्त कर दिया गया है. अब अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित श्रेणी के व्यक्ति ने अगर धर्म परिवर्तन किया तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा और सामूहिक धर्मांतरण कराने पर जेल जाना होगा. आरक्षण का लाभ छोड़ने के लिए संबंधित शख्स को एफिडेविट देना होगा. शनिवार को हिमाचल प्रदेश की मौजूदा बीजेपी सरकार ने अंतिम दिन विपक्ष के भारी हंगामे के बीच इससे जुड़े कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी.


हिमाचल प्रदेश में इसी साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं. अब उससे पहले विधानसभा का कोई सेशन नहीं होगा. शनिवार को विधानसभा के मॉनसून सत्र में पास किए गए धर्मांतरण संबंधी नए एक्ट का नाम ‘हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022’ है.


नये संशोधन विधेयक में बलपूर्वक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा को 7 साल से बढ़ाकर अधिकतम 10 साल तक करने का प्रस्ताव है. विधेयक में प्रस्तावित प्रावधान के मुताबिक इस कानून के तहत की गयी शिकायतों की जांच उप निरीक्षक से निचले दर्जे का कोई पुलिस अधिकारी नहीं करेगा. इस मामले में मुकदमा सेशन कोर्ट में चलेगा. हिमाचल प्रदेश धर्मांतरण कानून में प्रावधान है कि अगर कोई धर्म बदलना चाहता है तो उसे जिलाधिकारी को एक महीने का नोटिस देना होगा कि वह स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर रहे हैं.


संशोधित कानून के अनुसार अब जबरन या किसी तरह के लालच से सामूहिक धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. अब यदि 2 या उससे ज्यादा व्यक्तियों ने धर्म परिवर्तन किया तो उसे सामूहिक धर्म परिवर्तन माना जाएगा. पकड़े जाने पर सभी को सीधे 10 साल की जेल और 2 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा.


इस एक्ट में धर्म परिवर्तन का दोषी पाए जाने पर सात साल की सजा का प्रावधान था. अब इसे बढ़ाकर 10 साल किया गया है। यही नहीं, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह करने के लिए अपने धर्म को छिपाता है तो उस सूरत में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भी 3 से 10 साल तक की सजा और न्यूनतम 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है. जुर्माने की रकम अधिकतम एक लाख रुपए तक बढ़ाई जा सकती है. धर्म परिवर्तन के बावजूद मूल धर्म की सेवाएं लेने पर संबंधित व्यक्ति को 2 साल 5 साल तक की सजा और 5 हजार रुपए से 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.


बीजेपी शासित तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए हैं. इन राज्यों के बनाए कानूनों का उद्देश्य केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन को रोकना है. इसके अलावा हरियाणा विधानसभा मार्च 2022 में बल, अनुचित प्रभाव अथवा लालच के जरिए धर्मांतरण कराने के खिलाफ एक विधेयक पारित किया था.


बता दें कि भारतीय संविधान में हर नागरिक को अपना धर्म बदलने का अधिकार दिया हुआ है. अगर कोई व्यक्ति अपना मूल धर्म बदलकर दूसरा धर्म अपनाना चाहता है तो इसके लिए वो आझाद है. लेकिन बीजेपी शासित राज्य सरकारे लालच या अवैध धर्मांतरण का आरोप लगा कर धर्मांतरण पर ही प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रही है. यहीं नहीं अब तो एससी/एसटी के लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि अगर आपने धर्मांतरण किया तो उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाएगा.

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