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हिंदू पक्ष से कोर्ट का सवाल, किस कानून के तहत चाहिए कुतुब मीनार में पूजा का अधिकार

Published On :    24 May 2022   By : MN Staff
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याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने कहा कि सरकार ने कुतुब मीनार को संरक्षित स्मारक घोषित कर रखा है. पिछले 800 साल से इसे मुस्लिम इस्तेमाल नहीं कर रहे थे. जब वहां मस्जिद बनने से काफी पहले मंदिर था तो उसका जीर्णोद्धार क्यों हो सकता? जज ने कहा है कि अगर इसकी अनुमति दी गई तो संविधान के ढांचे, सेकुलर चरित्र को नुकसान पहुंचेगा. जैन के दावे पर अदालत ने पूछा कि अब आप जीर्णोद्धार कहकर इस स्मारक को मंदिर बनाना चाहते हैं. अगर यह मान लें कि 800 साल पहले मंदिर था तो भी आप यह दावा कैसे करेंगे कि वादियों का उसपर कानूनी अधिकार बनता है?



दिल्ली : दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के संबंध में दायर एक याचिका पर साकेत कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद मंदिर परिसर के स्थान पर बनाई गई थी. इसलिए हिन्दुओं को कुतुब मीनार परिसर में पूजा करने की इजाजत दी जानी चाहिए. इस पर कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं से पूछा कि आपको क्या लगता है कि यह एक स्मारक है या पूजा स्थल? कौन सा कानूनी अधिकार आपको किसी स्मारक को पूजा स्थल में बदलने का अधिकार देता है?


इस मामले में आदेश सुरक्षित रखते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए 9 जून की तारीख तय की है. हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन का दावा है यहां 1600 साल पुराना लोहे का स्तंभ और पूजा की वस्तु आज भी मौजूद हैं. याचिकाकर्ता जैन ने एएमएएसआर अधिनियम 1958 की धारा 16 को पढ़ा, इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित एक संरक्षित स्मारक जो पूजा स्थल या तीर्थस्थल है, उसका उपयोग उसके चरित्र के साथ असंगत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा.


याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने कहा कि सरकार ने कुतुब मीनार को संरक्षित स्मारक घोषित कर रखा है. पिछले 800 साल से इसे मुस्लिम इस्तेमाल नहीं कर रहे थे. जब वहां मस्जिद बनने से काफी पहले मंदिर था तो उसका जीर्णोद्धार क्यों हो सकता? जज ने कहा है कि अगर इसकी अनुमति दी गई तो संविधान के ढांचे, सेकुलर चरित्र को नुकसान पहुंचेगा. जैन के दावे पर अदालत ने पूछा कि अब आप जीर्णोद्धार कहकर इस स्मारक को मंदिर बनाना चाहते हैं. अगर यह मान लें कि 800 साल पहले मंदिर था तो भी आप यह दावा कैसे करेंगे कि वादियों का उसपर कानूनी अधिकार बनता है?


 साकेत कोर्ट के सामने जैन ने कहा कि मंदिर विध्वंस के बावजूद देवता का चरित्र नहीं बदलता. यही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देवता बच गए तो पूजा का अधिकार बच जाता है. इसपर अदालत ने कहा कि देवता 800 साल से बिना पूजा के बचे हुए हैं, उन्हें ऐसे ही बचे रहने दीजिए. अदालत ने कहा कि मूर्ति की मौजूदगी पर विवाद नहीं है. सवाल पूजा के अधिकार का है.


जैन ने कहा कि उनके संवैधानिक अधिकार का हनन हो रहा है. अदालत ने पूछा कैसे तो जैन ने अनुच्छेद 25 ओर अनुच्छेद 13(1) का जिक्र करते हुए जैन ने कहा कि मूल अधिकार कभी समाप्त नहीं होता. अदालत ने पूछा कि क्या पूजा मूल अधिकार है? जैन ने हां कहा तो कोर्ट ने पूछा कि कैसे? जैन ने कहा कि भारत में हजार साल पुराने मंदिर है, उनकी तरह यहां भी पूजा हो सकती है. इस पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया वकील सुभाष गुप्ता ने कहा कि अदालत के आदेश से छेड़छाड़ का कोई आधार नहीं है. गुप्ता के मुताबिक, 1958 एक्ट की परिधि में आने पर किसी जगह के चरित्र का निर्धारण होता है. एक बार स्मारक का चरित्र तय हो गया तो बदला नहीं जा सकता. इसी वजह से देश में कई स्मारक हैं जो पूजा स्थल नहीं हैं.


अगर कोई सुरक्षा स्थान बिना किसी व्यवधान के 800 वर्षों से जारी हैं तो उसे जारी रहना चाहिए. पूजा का मौलिक अधिकार है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में बताया है. गुप्ता ने कहा कि कुतुब मीनार पूजा स्थल नहीं है. उन्होंने कहा कि स्मारक सालों पहले बना था. किसी बदलाव के लिए कोई याचिका नहीं आई. अभी ये सब चीजें उठाई जा रही हैं.

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