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अब मदरसों में पढ़ाई जाएगी गीता और रामायण, एनआईओएस ने जारी किया नया सिलेबस

Published On :    4 Mar 2021   By : MN Staff
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पिछले दिनों केंद्र सरकार पर नई शिक्षा नीति में वेदों पर आधारित और वैदिक धर्म यानी ब्राम्हणी धर्म से संबंधित शिक्षा शामिल करने का आरोप लगा था. अब यह आरोप हकीकत में बदलता नजर आ रहा है.



नई दिल्ली : पिछले दिनों केंद्र सरकार पर नई शिक्षा नीति में वेदों पर आधारित और वैदिक धर्म यानी ब्राम्हणी धर्म से संबंधित शिक्षा शामिल करने का आरोप लगा था. अब यह आरोप हकीकत में बदलता नजर आ रहा है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) ने नया पाठ्यक्रम जारी किया है. जो प्राचिन भारत की शिक्षा की आड में वेद और ब्राम्हणी धर्म पर आधारित हैं और उसे प्राथमिक कक्षाओं में शुरू करने जा रहा है. 


एनआईओएस का नया पाठ्यक्रम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) का हिस्सा है जो 100 मदरसों में शुरू किया जाना है. एनआईओएस के नए पाठ्यक्रम में 15 पाठ्यक्रम शामिल हैं. एनआईओएस स्पेशल प्रोविजन फॉर क्वालिटी एजुकेशन ऑफ मदरसा (एसपीक्यूईएम) के तहत मदरसों को मान्यता देता है. इस प्रावधान के तहत शिक्षार्थियों को विभिन्न विषयों की पेशकश की जाती है. एनआईओएस द्वारा उपलब्ध कराए गए विषयों में से कौन से विषय पढ़ने हैं यह स्टूडेंट के ऊपर निर्भर करता है.


नए कोर्स कक्षा 3, 5 और 8 की प्रारंभिक शिक्षा के समान हैं. भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत 15 नए पाठ्यक्रमों में वेद, योग, विज्ञान, व्यावसायिक कौशल, संस्कृत भाषा, रामायण और महाभारत कथा, भगवद गीता उपदेश और महेश्वरा सूत्र, पतंजलि कृतासूत्र, योगसूत्र व्यायाम, सूर्य नमस्कार, आसन, प्राणायाम, तनाव दूर करने वाले व्यायाम आदि शामिल हैं. शिक्षा मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक 50 हजार छात्रों के साथ लगभग 100 मदरसे एनआईओएस से मान्यता प्राप्त हैं. इसके अलावा भविष्य में एनआईओएस के साथ मदरसों की मांग के आधार पर लगभग 500 और मदरसों को मान्यता देने की योजना है.



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एनआईओएस भारत के शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है. इसकी चेयरमैन सरोज शर्मा ने कहा कि भारतीय पारंपरित ज्ञान पद्धति को लेकर लोगों का रुझान बढ़े इसके लिए खास कदम उठाए जा रहे हैं. यह उन स्टूडेंट्स को शिक्षा देने के लिए है जो रेग्युलर कक्षाओं में हिस्सा नहीं ले सकते. एनआईओएस का नया सिलेबस केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने जारी करते हुए कहा कि भारत प्राचीन भाषा, विज्ञान और संस्कृति का एक पावरहाउस है. भारत में एक समृद्ध और प्राचीन विरासत के साथ एक ज्ञान महाशक्ति बनने की सभी क्षमताएं हैं.


शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि एनआईओएस न्यू करिकुलम का फायदा दुनिया भर में भारत और भारतीय समुदाय के स्टूडेंट्स को दिया जाएगा. शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए स्पष्टीकरण के अनुसार, एनआईओएस द्वारा प्रदान किए गए विषयों में से विषय का चयन करना स्टूडेट्स के विवेक पर है. एनआईओएस दो राष्ट्रीय बोर्ड में एक से है, जो प्राइमरी, सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्तर के कोर्स ओपन और डिस्टेंस एजुकेशन के जरिये कराते हैं.

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