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किसान बोले- 26 को ट्रैक्टर रैली तय, लंबी लड़ाई को हम तैयार

Published On :    18 Jan 2021   By : MN Staff
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26 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित किसानों की ट्रैक्टर रैली पर रोक की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न प्राधिकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और रोक लगाने की अपील की है. इस पर अदालत में 19 को सुनवाई होगी.



नई दिल्ली : 26 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित किसानों की ट्रैक्टर रैली पर रोक की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न प्राधिकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और रोक लगाने की अपील की है. इस पर अदालत में 19 को सुनवाई होगी. 


इसके बावजूद किसानो ने कहा है की वे 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर जुलूस निकाल कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे. इसके अलावा किसानों ने कहा हैं की वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं. किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सामने पेश नहीं होंगे.


किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे लंबी लड़ाई को तैयार हैं और दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा किसानों का धरना-प्रदर्शन ‘वैचारिक क्रांति’ है. दिल्ली में बैठे किसान नेताओं ने इस आशय के बयान दिए, वहीं नागपुर की यात्रा पर गए किसान नेता राकेश टिकैत ने वहां मीडियाकर्मियों से कहा, ‘हम मई 2024 तक प्रदर्शन करने को तैयार हैं. हमारी मांग है कि तीनों कानूनों को वापस लिया जाए और सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी प्रदान करे.


इससे पहले दिल्ली में सिंघू सीमा पर किसान यूनियन के नेता योगेंद्र यादव ने कहा, हम गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड करेंगे. गणतंत्र दिवस परेड में कोई भी व्यवधान नहीं होगा. किसान अपने ट्रैक्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाएंगे. किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा, 50 किलोमीटर लंबी इस परेड में एक हजार ट्रैक्टर हिस्सा लेंगे और इन ट्रैक्टरों पर तिरंगे झंडे लगाए जाएंगे. हम आशा करते हैं कि दिल्ली और हरियाणा पुलिस इसमें सहयोग करेंगी. परेड शांतिपूर्ण होगी.



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गैरतलब है की लाखों की संख्या में किसान दिल्ली से सटे बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र सरकार ने नए कृषि कानूनों को किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी किसान चिंता जता रहे हैं कि इससे वे कॉरपोरेट घरानों के मोहताज हो जाएंगे. सरकार कानूनों को निरस्त करने से इनकार कर चुकी है. किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानून एमएसपी के सुरक्षा घेरे को समाप्त करने और मंडी प्रणाली को बंद करने का रास्ता साफ करेंगे.


भाकियू के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को कहा ‘यह दिल्ली से शुरू हुई किसानों की वैचारिक क्रांति है और विफल नहीं होगी. गांवों में किसान चाहते हैं कि हम तब तक नहीं लौटें जब तक तीनों कृषि विधेयकों को वापस नहीं लिया जाता. सरकार विधेयकों को वापस नहीं लेने के अपने रुख पर अड़ी है और आंदोलन लंबे समय तक चलता रहेगा. उन्होंने नए कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा गठित समिति में जो सदस्य हैं, उन्होंने कृषि विधेयकों का समर्थन किया था. इसलिए हम अदालत द्वारा गठित समिति के समक्ष नहीं जाना चाहते.


नए कृषि कानूनों को लेकर 19 जनवरी को होने वाली दसवें दौर की वार्ता से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को किसान नेताओं से फिर आग्रह किया कि वे अपना अड़ियल रुख छोड़ दें और कानूनों की हर धारा पर चर्चा के लिए आएं. तोमर ने मध्य प्रदेश में अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र मुरैना रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इन कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है तो ऐसे में अड़ियल रुख अपनाने का कोई सवाल हीं नहीं उठता है. 



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उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान नेता 19 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में कानून की हर धारा पर चर्चा के लिए आएं. उन्होंने कहा कि कानूनों को निरस्त करने की मांग को छोड़कर, सरकार खुले मन के साथ अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार है. तोमर ने कहा कि सरकार ने कुछ रियायतों की पेशकश की थी, लेकिन किसान नेताओं ने लचीला रुख नहीं दिखाया और वे लगातार कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं.

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