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गरीबी के नाम पर गरीबों और बेरोजगारी के नाम पर बेरोजगारों को खत्म करने वाली कांग्रेस सरकार में पूर्व प्रधानमंत्री का बयान

Published On :    7 Aug 2020   By : MN Staff
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गंभीर बेरोजगारी के कारण एक पूरी पीढी हो सकती हैं बर्बाद : डॉ मनमोहन सिंह



नई दिल्ली : गरीबी के नाम पर गरीबों और बेरोजगारी के नाम पर बेरोजगारों को ही खत्म करने वाली कांग्रेस सरकार में पूर्व प्रधानमंत्री ने बेरोजगारी पर एक बयान देकर यह साबित कर दिया है कि गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई के नाम पर जनता को राजनीति की चक्की में पीसने से कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अब तक कोई कसर नहीं छोड़ी है. 


जब कांग्रेस की सत्ता आती है तो कांग्रेस गरीबी, बेरोजगारी और महँगाई के नाम पर जनता का इस्तेमाल करती है और जब बीजेपी की सत्ता आती है तो बीजेपी गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई के नाम पर जनता का इस्तेमाल करती है. नतीजन गरीबी, बेरोजगारी और महँगाई कम होने के बजाए और ज्यादा बढ़ जाती हैं. असल में यही दोनों पार्टियाँ गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई बढ़ाती हैं और बाद में दोनों पार्टियां एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर देते हैं, जिससे जनता भ्रमित हो जाती है और मामला शांत हो जाता है. 


ठीक ऐसा ही रवैया वर्तमान समय में भी चल रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि गंभीर बेरोजगारी के कारण एक पूरी पीढी बर्बाद हो सकती हैं. परन्तु, यहां पर सवाल खड़ा होता है कि क्या डॉ. मनमोहन सिंह के 10 साल के कार्यकाल में गरीबी, बेरोजगारी कम हुई? नहीं. क्योंकि, कांग्रेस गरीबी, बेरोजगारी को खत्म करने के बजाए सीधे गरीबों और बेरोजगारों को ही खत्म करने का अभियान चलाती रही. वहीं आज बीजेपी कर रही है.


द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा ये हमारे देश और दुनिया के लिए असाधारण कठिन समय हैं. कोविड-19 से लोग बीमारी और मौत के भय के चपेट में हैं. यह भय सर्वव्यापी है. कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए देश की अक्षमता और बीमारी के लिए एक पुष्ट इलाज के अभाव ने लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है. लोगों में इस तरह की चिंता की भावना समाज के कामकाज में जबरदस्त उथल-पुथल पैदा कर सकती है. नतीजतन सामान्य सामाजिक व्यवस्था में उथल-पुथल से आजीविका और बड़ी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. 



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मनमोहन सिंह ने कहा, आर्थिक संकुचन केवल अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण और बहस के लिए जीडीपी नंबर नहीं है. इसका अर्थ है कई वर्षों की प्रगति का उलटा असर. हमारे समाज के कमजोर वर्गों की एक बड़ी संख्या गरीबी में लौट सकती है, यह एक विकासशील देश के लिए दुर्लभ घटना है. कई उद्योग बंद हो सकते हैं. गंभीर बेरोजगारी के कारण एक पूरी पीढ़ी खत्म हो सकती है. संकुचित अर्थव्यवस्था के चलते वित्तीय संसाधनों में कमी के कारण अपने बच्चों को खिलाने और पढ़ाने की हमारी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. आर्थिक संकुचन का घातक प्रभाव लंबा और गहरा है, खासकर गरीबों पर.


मनमोहन ने आगे कहा, इस प्रकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाने के लिए पूरी ताकत के साथ काम करना अत्यावश्यक है. आर्थिक गतिविधियों में स्लोडाउन बाहरी कारकों जैसे लॉकडाउन और भय से प्रेरित लोगों और कंपनियों का व्यवहार है. हमारी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का आधार पूरे इकोसिस्टम में विश्वास को वापस लाना है.



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लोगों को अपने जीवन और आजीविका के बारे में आश्वस्त महसूस करना चाहिए. उद्यमियों को निवेश को फिर से खोलने और बनाने के लिए आश्वस्त होना चाहिए. बैंकरों को पूँजी प्रदान करने के बारे में आश्वस्त महसूस करना चाहिए. हकीकत तो यही है कि जनता को चुनाव में इस्तेमाल करने के अलावा जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए कांग्रेस और बीजेपी को आज तक महसूस नहीं हुआ है. केवल जनता को मूर्ख बनाने के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. जबकि देश में गरीब, बेरोजगारी, महंगाई इन्हीं दोनों पार्टियों ने जानबूझकर बढ़ाई है. 

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