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एक तरफ बहिष्कार, दूसरी तरफ दोस्ताना

Published On :    6 Aug 2020   By : MN Staff
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चीन बहिष्कार के देशव्यापी अभियान के बीच भारत ने चीनी कंपनी से खरीदे कोरोना जांच किट्स



नई दिल्ली : जनता को मूर्ख बनाने की कला कोई नरेन्द्र मोदी से सीखे. हालांकि, इस काम में जितनी माहिर बीजेपी की सरकार है इससे कम कांग्रेस सरकार नहीं है. दोनों ने समय-समय पर देश की जनता को मूर्ख बनाने का काम बड़ै पैमाने पर किया है. इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला है. एक तरफ मोदी सरकार देश में चीन का बहिष्कार करने के लिए अभियान चला रही है तो वहीं दूसरी तरफ चीन से दोस्ताना भी निभा रही है. 


भारत और चीन के मध्य चल रहे सीमाई गतिरोध के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोविड-19 की जांच के लिए चीनी कंपनी से जांच किट खरीदा है. खास बात ये है कि भारत सरकार की ओर से इस जांच किट के लिए ऑर्डर प्राप्त करने वालों की सूची में चीनी कंपनी एकमात्र विदेशी कंपनी है. इस बात का खुलासा तब हुआ जब द वायर ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून, 2005 के तहत जानकारी मांगी.

मालूम हो कि कोरोना महामारी संबंधी कार्यों को देखने के लिए आईसीएमआर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सर्वोच्च संस्था है.आईसीएमआर ने कोविड-19 जांच के लिए एचएलएल इंफ्रा टेक सर्विसेस लिमिटेड (एचआईटीईएस) के जरिए 8 मई 2020 को एक टेंडर जारी किया था. इसके तहत वाइरल ट्रांसपोर्ट मीडिया (वीटीएम), आरएनए एक्सट्रैक्शन किट और आरटी-पीसीआर किट की खरीददारी की जानी थी. 


एचआईटीईएस केंद्र की सार्वजनिक उपक्रम एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की सहायक कंपनी है और आईसीएमआर ने इन किट्स की खरीददारी की जिम्मेदारी एचआईटीईएस को दी थी. इस टेंडर के परिणामों की घोषणा 8 जून 2020 को हुई थी. प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि आईसीएमआर ने चीनी कंपनी मेसर्स ज़ाईबिओ इंक से 13.35 करोड़ रुपये की कीमत के 13.10 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट खरीदने का ऑर्डर दिया है.

कोविड-19 की जांच में आरएनए एक्सट्रैक्शन किट का भी इस्तेमाल होता है. एचएलएल द्वारा जारी खरीद ऑर्डर के मुताबिक एक किट की कीमत जीएसटी को मिलाकर 101.92 रुपये है. इन किट्स को भारत लाने की जिम्मेदारी मेडिकल उपकरणों की आयातक कंपनी लखनऊ स्थित पीओसीटी सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है. 


कंपनी को जारी खरीद ऑर्डर में कहा गया है कि कुल पांच चरणों में इन किट्स की डिलीवरी की जाएगी. पहली डिलीवरी ऑर्डर दिए जाने के सातवें दिन, दूसरा 14वें दिन, तीसरा 21वें दिन, चौथा 28वें दिन और पांचवा 35वें दिन पर की जाएगी. इसके साथ ही इसमे ये भी कहा गया है कि अगर सप्लायर चाहे, तो इन किट्स को और जल्दी पहुंचा सकता है. बताते चलें कि आईसीएमआर ने कुल 33 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट के लिए टेंडर निकाला था, जिसमें से 13.10 लाख टेस्ट/किट्स की खरीदी चीनी कंपनी से हुई है.

मालूम हो कि सीमाई विवाद को लेकर जून महीने में चीनी सैनिकों द्वारा हमले में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. जबकि, मई महीने से ही भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में एक दूसरे के आमने-सामने बनी हुई थी. लेकिन जनता को मूर्ख बनाने के लिए सरकार चीन बहिष्कार के लिए अभियान शुरू किया और टिकटॉक पर बैन लगा दिया, जबकि चीन की बड़ी कंपनियों से दोस्ताना वैसे ही चलता रहा है जैसे पहले से चल रही थी.
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