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भारत विकासशील देशों की सूची से बाहर

Published On :    15 Feb 2020   By : MN Staff
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अमेरिका ने हटाया विकासशील देशों की सूची से भारत का नाम



यूएस : वर्ल्ड बैंक द्वारा भारत को विकासशील देशों की सूची से हटाने के बाद अब अमेरिका ने भी भारत को विकासशील देशों की सूची हटाकर भारत की मौजूदा सरकार को तगड़ा झटका दे दिया है. अमेरिका ने भारत की मौजूदा सरकार को उस वक्त झटका दिया है जब 24 और 25 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आने वाले हैं. 


ट्रंप की यात्रा से पहले ही अमेरिका ने भारत को विकासशील देशों की सूची से हटा दिया. यूएसटीआर कार्यालय ने भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में वर्गीकृत किया है, जो विकासशील देशों को वाशिंगटन से मिलने वाले लाभों के लिए अयोग्य बनाता है.


गौरतलब है कि सोमवार भारत को उन विकासशील देशों की सूची से हटा दिया है, जिन्हें अमेरिकी की काउंटरवेलिंग ड्यूटी (सीवीडी) से छूट हासिल है. हालांकि, भारत के अलावा ब्राजील, इंडोनेशिया, हॉन्गकॉन्ग, साउथ अफ्रीका और अर्जेंटीना भी बाहर हो गये हैं. 


सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप 24-25 फरवरी को भारत दौरे पर आने वाले हैं. हालांकि इससे पहले अमेरिका ने सोमवार को भारत को उन विकासशील देशों की सूची से हटा दिया है, जिन्हें अमेरिकी की काउंटरवेलिंग ड्यूटी से छूट हासिल है. यह छूट देने के लिए यह देखा जाता है कि ये देश अनुचित सब्सिडी एक्सपोर्ट के जरिए अमेरिकी इंडस्ट्री को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे हैं?


यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (यूएसटीआर) ने भारत के अलावा ब्राजील, इंडोनेशिया, हॉन्गकॉन्ग, साउथ अफ्रीका और अर्जेंटीना को भी लिस्ट से बाहर किया है. इन सभी देशों को स्पेशल तरजीह दी जाती थी, जिसके चलते इन्हें सीवीडी जांच से छूट हासिल थी. यूएटीआर ने कहा कि इन देशों को 1988 की स्थिति के आधार पर छूट दिया गया था, जो ’अब मौजूद नहीं’ हैं। भारत को इस सूची से इस आधार पर बाहर किया गया कि वह जी-20 देशों में आता है और वर्ल्ड ट्रेड में उसका योगदान 0.5 पर्सेंट या उससे ज्यादा है.


अमेरिका के साथ ट्रेड डील के तहत भारत जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (जीएसपी) के तहत विशेष छूट पाने वाले देश का दर्जा वापस बहाल करने की मांग में जुटा था. हालांकि, अमेरिका के इस कदम से उसकी मुहिम को भारी झटका लगा है. क्योंकि, जीएसपी दर्जा सिर्फ विकासशील देशों को ही दिया जाता है. यूएसटीआर ने एक बयान में कहा, जिन देशों का वर्ल्ड ट्रेड में हिस्सा 0.5 पर्सेंट या उससे अधिक है, यूएसटीआर उन्हें अमेरिकी सीवीडी नियम के लिए विकसित देश मानती है.


बता दें कि 2018 में भारत का ग्लोबल एक्सपोर्ट में 1.67 पर्सेंट और ग्लोबल इंपोर्ट में 2.57 पर्सेंट हिस्सा था. जबकि, पिछले साल ट्रंप ने कहा था कि कुछ देशों ने नियमों में लचीलेपन का फायदा उठाने के लिए खुद को विकासशील घोषित कर रखा है. उन्होंने ऐसे देशों को दिए जाने वाले विशेष छूट को बंद करने के लिए अपने प्रशासन को निर्देश दिए थे. 


यूएसटीआर ने अपने बयान में यह भी कहा है कि इसलिए ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम 2 पर्सेंट डी मिनिमिस स्टैंडर्ड के लिए योग्य नहीं हैं. इसके बावजूद वर्ल्ड बैंक के हालिया आंकड़ों के मुताबिक प्रत्येक देश की ग्रॉस नेशनल इनकम 12,375 डॉलर से कम है. विकासशील देशों को 2 पर्सेंट तक एक्सपोर्ट या प्रोडक्शन सब्सिडी दी जाती है.


अमेरिका ने पिछले साल जनवरी में भारत और चीन जैसे उभरती इकॉनमीज को दिए जाने वाले विशेष छूट और अधिकार वापस लेने का प्रस्ताव रखा था. ये देश ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक कोऑपरेशन एंड डिवेलपमेंट (ओईसीडी) जी-20 के सदस्य देश हैं, जो वर्ल्ड बैंक की ओर से अधिक आय वाली श्रेणी में आते हैं और ग्लोबल देश में इनका हिस्सा 0.5 पर्सेंट से अधिक है. एक्सपर्ट का कहना है कि इससे भारत की जीएसपी दर्जा वापस बहाल करने की मुहिम को झटका लगा है. एक एक्सपर्ट ने बताया, इस नोटिस के मुताबिक भारत अब विकासशील देश नहीं है.



यह भी पढ़े :  एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ करार


वर्ल्ड बैंक भी हटा चुका है सूची से नाम
इससे पहले वर्ल्ड बैंक ने भी विकासशील देशों की सूची से नाम हटा दिया था. अब भारत लोअर मिडिल इनकम कैटेगरी में गिना जाएगा. वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत नए बंटवारे के बाद जांबिया, घाना, ग्वाटेमाला, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की श्रेणी में आ गया है. भारत के लिए  सबसे बुरी बात यह है कि ब्रिक्स देशों में भारत को छोड़कर चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील अपर मिडिल इनकम श्रेणी में आते हैं. अभी तक लो और मिडिल इनकम वाले देशों को भी विकासशील और हाई इनकम वाले देशों को विकसित देशों में गिना जाता रहा है.
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