×

अपनी सरकार से कहें कि हमारे फैसले खेलने के लिए नहीं हैंः जस्टिस आरएफ नरीमन

Published On :    16 Nov 2019   By : MN Staff
साझा करें:

जस्टिस नरीमन ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, कृपया अपनी सरकार को सबरीमला मामले में गुरुवार को सुनाये गये असहमति के फैसले को पढ़ने के लिए कहें, हमारा फैसला अडिग है.



नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरएफ नरीमन ने शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता लताड़ लगाते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से नहीं खेल सकती है. जस्टिस नरीमन ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, कृपया अपनी सरकार को सबरीमला मामले में गुरुवार को सुनाये गये असहमति के फैसले को पढ़ने के लिए कहें, जो बहुत ही महत्वपूर्ण है. हमारा फैसला खेलने के लिए नहीं है. अपनी सरकार से कहिए कि हमारा फैसला अडिग है.


बता दें कि, जस्टिस नरीमन ने अपनी और जस्टिस धनंजय वाई. चन्द्रचूड़ की ओर से असहमति का आदेश लिखा था. जस्टिस नरीमन और जस्टिस चन्द्रचूड़ सबरीमला मामले की सुनवाई करने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सदस्य थे ओर उन्होंने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने संबंधी सितंबर, 2018 के शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार की याचिकाओं को खारिज करते हुये बृहस्पतिवार को बहुमत के फैसले से असहमति व्यक्त की थी.



यह भी पढ़िए : एमनेस्टी इंडिया पर एफसीआरए उल्लंघन मामले में केस दर्ज



जस्टिस नरीमन ने मेहता से यह उस वक्त कहा जब न्यायालय मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपील पर सुनवाई कर रहा था.


लाइव लॉ के अनुसार, शिवकुमार के मामले की सुनवाई वाली पीठ में जस्टिस नरीमन के साथ जस्टिस रविंद्र भट्ट भी थे. पीठ ने शुरू में खुद ही ईडी की याचिका पर सुनवाई करने पर अनिच्छा जताई थी. हालांकि, जब सॉलिसिटर जनरल पीठ से लगातार मामले को खारिज न करने की अपील करते रहे तब जस्टिस नरीमन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन को लेकर टिप्पणी की.


जस्टिस नरीमन ने सबरीमाला समीक्षा मामले पर अपने असहमति के फैसले से प्राधिकारियों को अवगत कराने के लिए कहा, जहां पर उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुपालन अनिवार्य है. 


सबरीमाला समीक्षा मामले में जस्टिस नरीमन ने जो टिप्पणी की थी वह कुछ समूहों द्वारा की गई हिंसा के संबंध में थी जिसमें वे सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश रोक रहे थे. 


जस्टिस नरीमन ने सबरीमाला समीक्षा मामले में असहमति के फैसले को सुनाते हुए कहा था, संविधान ने सभी विभागों की यह जिम्मेदारी तय की है कि वे इस अदालत के फैसले को किसी भी तरह लागू करें. कानून का शासन स्थापित करने के लिए ऐसा कर्तव्य तय किया गया है.


 अगर अदालत के फैसलों को लागू करवाने वाले उसे लागू करने से अपनी असहमति जताएंगे तो कानून का शासन नहीं रह जाएगा. जस्टिस नरीमन ने कहा कि भले ही नागरिकों को संवैधानिक रूप से फैसलों की आलोचना का अधिकार हो लेकिन उन्हें सर्वोच्च अदालत के आदेशों या निर्देशों का उल्लंघन करने या उल्लंघन के लिए उकसाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. 

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
सरकार की जेएनयू प्रशासन को सलाह वापस ले छात्रों पर लगे के
उत्तर प्रदेश में बलात्कार का मामला वापस न लेने पर चार दरि
16 दिसंबर को निर्भया के दोषियों की फांसी देने की अटकलें ते
शिवसेना ने केंद्र पर लगाया हिंदू-मुस्लिम विभाजन करने का
हैदराबाद एनकाउंटर के खिलाफ एफआईआर और जांच की मांग सुप्री
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी सह जेडीय
नागरिकता संशोधन बिल देश और संविधान का अपमान अखिलेश यादव
हैदराबाद, उन्नाव के बाद बिहार के मुजफ्फरपुर में दरिंदगी
झारखंड चुनाव में 15 फीसदी मुस्लिमों की अनदेखी
सारकेगुड़ा क़े आदिवासियों को कब मिलेगा इंसाफ
भीषण आग की चपेट में दिल्ली की अनाज मंडी
रेप पीड़िता की मौत के बाद लोगों में गुस्सा सांसद साक्षी मह
हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की क
पंकजा मुंडे और रोहिणी को हराने में बीजेपी नेताओं का हाथ ए
टीएमसी कार्यकर्ताओं ने गवर्नर दिखाए को काले झंडे लगाए ‘र
रेप की राजधानी बना उत्तर प्रदेश का उन्नाव
तेजस्वी यादव ने ओवैसी पर साधा निशाना
भोजपुरी जागृति गीत बचनिया माना ए बहुजन, दरद मनुवाद...
नागरिकता संशोधन विधेयक को कामयाब बनाने के लिए संघ का प्ल
जिंदगी की जंग हार गई उन्नाव गैंगरेप पीड़िता
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper